अंतिम दर्शन में उमड़ा जनसैलाब, जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी ने माहौल को कर दिया और भी गमगीन
उमेश चन्द्र त्रिपाठी
नितिन सिंह के असमय निधन ने पूरे क्षेत्र को गहरे शोक में डुबो दिया। जैसे ही उनके अंतिम दर्शन की खबर फैली, सिंहपुर मानो ठहर-सा गया। हर गली, हर रास्ता उनके आवास की ओर बढ़ते कदमों से भर गया। आंखों में आंसू और दिल में भारी पीड़ा लिए लोग अंतिम बार नितिन सिंह का चेहरा देखने पहुंचे।
अंतिम दर्शन में जनप्रतिनिधियों का तांता लगा रहा। पूर्व सभापति गणेश शंकर पाण्डेय, पूर्व विधायक मुन्ना सिंह, पूर्व विधायक अमनमणि त्रिपाठी, ब्लॉक प्रमुख संतोष कुमार पाण्डेय, सदामोहन उपाध्याय, पूर्व जिला पंचायत सदस्य पंकज उपाध्याय, भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष समीर त्रिपाठी, रंजन त्रिपाठी सहित अन्य जिलों से पहुंचे तमाम विधायक जनप्रतिनिधि और विभिन्न राजनीतिक दलों के पार्टी अध्यक्ष मौजूद रहे।

हर कोई शोकाकुल परिवार के सामने नतमस्तक दिखाई दिया। इसके साथ ही आसपास और दूर-दराज के कई गांवों से आए ग्राम प्रधानों की उपस्थिति ने नितिन सिंह के सामाजिक जुड़ाव और लोकप्रियता को स्पष्ट कर दिया।
श्रद्धांजलि के दौरान माहौल इतना भावुक हो गया कि अपने आंसुओं को कोई रोक नहीं पाया। नितिन सिंह के पिता लल्लू सिंह जी को ढांढस बंधाते हुए कई जनप्रतिनिधियों की आंखें भी छलक पड़ीं। शब्द साथ नहीं दे पा रहे थे, बस खामोशी में गूंजता दर्द हर दिल को चीर रहा था।

पूरा गांव श्मशान-सा सन्नाटा ओढ़े खड़ा रहा। हर चेहरे पर एक ही सवाल था- इतनी कम उम्र में यह कैसी विदाई? नितिन सिंह की मुस्कान, उनका अपनापन और सरल स्वभाव लोगों की आंखों के सामने घूमता रहा और हर याद आंसुओं में बदलती चली गई। यह दृश्य ऐसा था, जिसने पत्थर दिल को भी रुला दिया।
नितिन सिंह भले ही आज हमारे बीच न हों, लेकिन उनकी यादें, उनका अपनापन और लोगों के दिलों में उनके लिए उमड़ा यह सैलाब हमेशा गवाही देता रहेगा कि वे कितने खास थे।





