मनोज कुमार त्रिपाठी
लुंबिनी।
विश्व शांति के प्रतीक लुंबिनी में पर्यटन गतिविधियां ठप पड़ने से होटल व्यवसाय गहरे संकट में आ गया है। लुंबिनी स्थित बुद्ध माया होटल और बुद्ध माया होटल पैलेस के संचालक एवं स्थानीय समाजसेवी मेघनाथ आचार्य ने पर्यटन व्यवस्था और सरकारी नीतियों पर गंभीर चिंता जताई है।

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मेघनाथ आचार्य ने बताया कि वे पिछले 40 वर्षों से लुंबिनी क्षेत्र की जनता की सेवा कर रहे हैं। सेवा के साथ-साथ स्वरोज़गार और पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उन्होंने बुद्ध माया होटल की स्थापना की। विगत 10 वर्षों से संचालित बुद्ध माया होटल, लुंबिनी का पहला स्विमिंग पूल युक्त होटल है। इसके अतिरिक्त उन्होंने बुद्ध माया होटल पैलेस के नाम से एक नया और आधुनिक होटल भी विकसित किया है।
उन्होंने बताया कि अब तक इस परियोजना में करीब 30 से 40 करोड़ रुपये की लागत लगाई जा चुकी है। होटल में स्विमिंग पूल, मैरिज हॉल, दो भव्य बिल्डिंग और फोर-स्टार स्तर की सुविधाएं मौजूद हैं। बावजूद इसके, वर्तमान समय में होटल लगभग पूरी तरह खाली पड़ा है।
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मेघनाथ आचार्य के अनुसार, लुंबिनी विकास परियोजनाओं के बावजूद होटल व्यवसायियों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसका मुख्य कारण यह है कि विदेशों से आने वाले पर्यटक अपने-अपने धर्मशालाओं और गेस्ट हाउसों में ही रुक जाते हैं, जिससे स्थानीय होटलों को कोई लाभ नहीं मिल रहा। इसके अलावा “किचन टूरिज्म” बढ़ने से पर्यटक केवल कुछ घंटों के लिए आते हैं, रास्ते में खाना बनाते हैं और बिना रुके लौट जाते हैं।
उन्होंने बताया कि लुंबिनी में पर्यटन का सीजन सिर्फ 3–4 महीने का होता है। अत्यधिक गर्मी और कड़ाके की ठंड में पर्यटकों की संख्या नगण्य रहती है। इस वर्ष तो सीजन के दौरान भी स्थिति लगभग शून्य रही है। जीएनजी, सड़क-बाइक समस्याओं और अन्य कारणों से पर्यटकों की संख्या बेहद कम हो गई है।
मेघनाथ आचार्य ने मीडिया के माध्यम से सरकार और प्रशासन से अपील करते हुए कहा कि भारतीय पर्यटकों के आने की सबसे अधिक संभावना है, लेकिन कक्रहवां बॉर्डर नाका उनके लिए सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। खासकर पीले नंबर प्लेट (कमर्शियल) वाहनों को प्रवेश न मिलना पर्यटन के विकास में बड़ी रुकावट है। यदि इन वाहनों को सीधा लुंबिनी प्रवेश की अनुमति दी जाए, तो पर्यटन और स्थानीय व्यवसाय को नई गति मिल सकती है।
उन्होंने अंत में कहा कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो लुंबिनी के होटल व्यवसायी गंभीर आर्थिक संकट में डूब सकते हैं।






