मनरेगा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की पुष्टि, 6.37 लाख की रिकवरी तय, ग्राम प्रधान के वित्तीय अधिकार सीज

उमेश चन्द्र त्रिपाठी 

महराजगंज! महराजगंज जनपद के  विकास खंड लक्ष्मीपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत सिसवनिया विशुन में मनरेगा योजना के तहत कराए गए कार्यों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता उजागर होने से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। 

जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने कड़ी कार्रवाई करते हुए ग्राम प्रधान के प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकार सीज कर दिए हैं। जांच में 6 लाख 37 हजार 254 रुपये की शासकीय धनराशि के दुरुपयोग की पुष्टि हुई है।

यह कार्रवाई गांव के ही निवासी घनश्याम, बैजनाथ, कृपाशंकर, शिव कुमार सहित अन्य ग्रामीणों द्वारा 21 मार्च 2025 को की गई शिकायत के बाद सामने आई है। शिकायत में मनरेगा के अंतर्गत कराए गए मिट्टी कार्य, चकमार्ग एवं चकबंदी कार्यों में नियमों की अनदेखी और धन की बंदरबांट का गंभीर आरोप लगाया गया था। 

प्रारंभिक जांच के लिए परियोजना निदेशक, ग्राम्य विकास अभिकरण को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया। जांच के दौरान कुल 46 बिंदुओं पर गहन परीक्षण किया गया, जिनमें से 42 आरोप असत्य पाए गए, जबकि चार मामलों में गंभीर वित्तीय अनियमितता पूरी तरह प्रमाणित हुई। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि ग्राम पंचायत में भूमि विकास (मिट्टी कार्य) से जुड़े कार्यों को मनरेगा के वार्षिक मास्टर सर्कुलर 2024-25 में निर्धारित ड्यूरेबिलिटी अवधि से पहले ही दोबारा करा दिया गया, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है।

राजेंद्र धोबी के खेत से सोनवल सिवान तक सुरेश के खेत से बेलवा जंगल तक बृजलाल के खेत से मदरहना सिवान तक मिश्री के घर से थरौली सिवान तक इन सभी चकमार्ग/चकबंदी कार्यों में कुल ₹6,37,254 की धनराशि को वसूली योग्य माना गया है।

जांच के दौरान ग्राम प्रधान मुराती देवी एवं तत्कालीन ग्राम सचिव द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण को जिलाधिकारी ने असंतोषजनक करार दिया। आरोपों के खंडन में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जा सका।

इसके बाद उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम 1947 की धारा 95(1) (छ) के तहत ग्राम प्रधान के प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकार तत्काल प्रभाव से सीज कर दिए गए।

अंतिम जांच पूरी होने तक ग्राम पंचायत का संचालन अब तीन सदस्यीय समिति द्वारा किया जाएगा। वहीं अंतिम जांच के लिए जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी कन्हैया यादव तथा लोक निर्माण विभाग के जूनियर इंजीनियर सुधीर कुमार वर्मा को जांच अधिकारी नामित किया गया है।

प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से स्पष्ट है कि सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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