फिल्म घूसखोर पंडित के प्रसारण का मामला
उमेश चन्द्र त्रिपाठी
वाराणसी! जो फिल्म घूसखोर पंडित के नाम पर बनी है, यह एक ऐसा समय है जब पूरे देश में पूरे उत्तर प्रदेश में हर जगहों पर तरह-तरह के हथकंडे अपनाकर ब्राह्मणों की बेइज्जती की जा रही है। यदि किसी निर्देशक को कोई पिक्चर बनाना है तो वो पिक्चर का नाम कोई दूसरा भी रख सकता था, उसे सब से सस्ता नाम यही मिला कि वो घूसखोर पंडित के हैं। ये घूसखोर पंडित कोई व्यक्ति नहीं है, बल्कि पूरे एक समाज की आलोचना की जा रही है। वो ब्राह्मण समाज जो पूरे देश के समाज का मुकुट है, जिसे ये माना जाता है कि वो व्यक्ति का मस्तिष्क है, लोगों को ज्ञान देता है, वो सबको धर्म-कर्म सिखाता है और इस तरह की कि बेइज्जत करना ये सरासर गलत है। इसे तत्काल वापस लिया जाए, अन्यथा पूरे प्रदेश में देश में जहां-जहां ये पिक्चर लगे जमकर उन सिनेमा हालों पर इसका विरोध किया जाएगा। ये हमारा सबसे अनुरोध है। इसे किसी भी तरह बर्दाश्त करने लायक नहीं है, ब्राह्मण इतना आसान नहीं है कि कोई भी ब्राह्मण को बेइज्जत करता फिरे।
हम लोकतांत्रिक और संवैधानिक मार्ग पर विश्वास रखते हैं। यह हमारी विनम्र लेकिन दृढ़ चेतावनी है कि यदि इस विषय पर उचित कदम नहीं उठाया गया, तो पूरे प्रदेश और देश में जहां-जहां यह फिल्म प्रदर्शित होगी, वहां-वहां ब्राह्मण समाज शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से इसका व्यापक विरोध करेगा।
“सवाल तो यह है कि भारत के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने इसके प्रसारण की अनुमति किस प्रकार दी?”
हमारा यह अनुरोध है कि ब्राह्मण समाज के सम्मान और स्वाभिमान के साथ खिलवाड़ बंद किया जाए। इसे किसी भी तरह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ब्राह्मण इतना कमजोर नहीं है कि कोई भी उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाता फिरे।