उमेश चन्द्र त्रिपाठी
लखनऊ (यूपी)! उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली भाजपा सरकार का दूसरा मंत्रिमंडल विस्तार बहुत जल्द होने जा रहा है। 2027 के विधानसभा चुनाव और इस वर्ष होने वाले पंचायत चुनावों को ध्यान में रखते हुए सरकार गुजरात मॉडल की तर्ज पर बड़े बदलाव कर सकती है।
सूत्रों के अनुसार वर्तमान मंत्रिमंडल में करीब 12 से अधिक मंत्रियों को हटाकर उनकी जगह नए सामाजिक समीकरणों वाले लगभग 15 विधायकों और पार्टी पदाधिकारियों को शामिल किए जाने की संभावना है। इसका मकसद सत्ता गठबंधन को मजबूती देना और पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को सशक्त बनाना बताया जा रहा है।
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि गुजरात में भूपेंद्र पटेल सरकार ने 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले 16 मंत्रियों को इस्तीफा देने के बाद नए मंत्रियों की विशाल सूची बनाई थी, जिसमें 19 नए चेहरों को मौका मिला। इस रणनीति का लाभ भाजपा को चुनाव में मिला था, जब उसने 182 में से 156 सीटें पर विजय प्राप्त की थी।
इसी रणनीति से प्रेरणा लेकर उत्तर प्रदेश में भी इसी रणनीति से प्रेरणा लेकर उत्तर प्रदेश में भी बदलाव किए जाने की बात चल रही है।
वर्तमान में योगी सरकार में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के नेतृत्व में कुल 21 कैबिनेट मंत्री, 14 राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार और 19 राज्यमंत्री हैं। कुल मिलाकर वर्तमान में 54 मंत्री हैं जबकि विधान सभा के आकार के अनुसार अधिकतम 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं, जिससे अभी छह और मंत्री शामिल किए जा सकते हैं।
हाल ही में 14 दिसंबर 2025 को पंकज चौधरी को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, और राष्ट्रीय स्तर पर नितिन नवीन ने राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली है। इस बदलाव के बाद माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार अब शीघ्र होने की संभावना और बढ़ गई है।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय नेतृत्व की सलाह पर यदि बड़े बदलाव होते हैं तो मौजूदा मंत्रियों को अगले एक साल तक फील्ड में सक्रिय रखा जाएगा। इससे उन्हें चुनावी माहौल में पार्टी के लिए काम करने के साथ-साथ जनता के बीच अपनी लोकप्रियता भी बढ़ाने का मौका मिलेगा।
नए विधायकों और कार्यकर्ताओं को मंत्री बनाने से सामाजिक समीकरणों में संतुलन आने के साथ-साथ सरकार में नई ऊर्जा और नेतृत्व के निर्माण की उम्मीद जताई जा रही है।
हालांकि, कुछ वरिष्ठ नेताओं का यह भी मत है कि चुनावी साल में बड़े बदलाव करने के बजाय छोटे बदलाव और विभागों का फेरबदल ही बेहतर रणनीति हो सकती है। उनका तर्क है कि मौजूदा मंत्रियों को हटाने से टिकट की चिंता समेत अन्य बीजेपी छोड़कर अन्य दलों में जाने जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए वे सुझाव दे रहे हैं कि खाली पदों पर नए चेहरों को शामिल किया जाना चाहिए और मौजूदा मंत्रियों को उनके विभाग बदलकर नई जिम्मेदारियां दी जानी चाहिए।
प्लानिंग और समीक्षा के तहत मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर मंडल, प्रांत और केंद्र स्तर पर लगातार विचार-विमर्श जारी है, और आने वाले दिनों में इसके ऐलान की उम्मीद है।