नेपाली कांग्रेस के नेता एवं देश के जाने-माने उद्योगपति विनोद चौधरी का राजनीतिक सफर 

प्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली अंतर्गत नवलपरासी क्षेत्र संख्या एक से 2079 में पहली बार जीते थे चुनाव,इस बार दूसरी बार लड़ रहे हैं चुनाव 

विनोद चौधरी का भारत से है खास रिश्ता

2079 में विनोद चौधरी तीसरी बार संसद पहुंचे थे लेकिन उस बार उन्होंने चुनाव लड़कर प्रतिनिधि सभा की सीट हासिल की थी। उससे पहले वह समानुपातिक प्रतिनिधित्व कोटे से संसद जा रहे थे।

उमेश चन्द्र त्रिपाठी 

काठमांडू ! नेपाली कांग्रेस के नेता विनोद चौधरी 2079 में प्रतिनिधि सभा के लिए हुए चुनाव में जीत दर्ज की थी। नेपाली संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा में अपने प्रतिनिधत्व के लिए उन्हें पश्चिम नवलपरासी की जनता ने चुन लिया था। चौधरी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी हृदयेश त्रिपाठी को 7,178 वोटों के अंतर से मात दी थी। प्रतिनिधि सभा के लिए चुने जाने के तुरंत बाद चौधरी ने मतदाताओं का आभार व्यक्त करने के लिए एक रैली का आयोजन भी किया था।

तीसरी बार संसद पहुंचे थे विनोद चौधरी

यह तीसरी बार था जब चौधरी संघीय संसद के निचले सदन में पहुंचे थे। इससे पहले चौधरी 2064 विक्रम संवत के पहले संविधान सभा चुनाव और 2074 विक्रम संवत के संसदीय चुनाव में समानुपातिक प्रतिनिधित्व कोटे से सांसद बने थे। चौधरी को 2064 विक्रम संवत में सीपीएन-यूएमएल ने और 2074 विक्रम संवत में हुए चुनावों में नेपाली कांग्रेस ने संसदीय सदस्य के रूप में चुना था। उस वक्त चौधरी ने कहा था कि वह इस बार समानुपातिक प्रतिनिधित्व कोटे से संसद नहीं पहुंचना चाहते थे, और लोगों द्वारा सीधे चुनकर निचले सदम में जाना चाहते थे, इसलिए उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला किया।

नेपाल के सबसे अमीर बिजनसमैन हैं विनोद चौधरी 

विनोद चौधरी फोर्ब्स के अरबपतियों की लिस्ट में शामिल एक मात्र नेपाली उद्योगपति हैं। वह नेपाल के सबसे सफल बिजनसमैन में से एक हैं और उनकी कुल संपत्ति 170 करोड़ डॉलर आंकी गई है। तीन भाइयों में सबसे बड़े विनोद ने चौधरी ग्रुप की स्थापना की और सफलता की नई कहानियां लिखीं। इनका ग्रुप आज इंश्योरेंस, फूड, रियल एस्टेट, रिटेल और इलेक्ट्रॉनिक्स समेत तमाम क्षेत्रों में काम करता है। चौधरी ग्रुप में करीब 16 हजार लोग काम करते हैं। चौधरी अपने चैरिटी के कामों के लिए भी जाने जाते हैं और 2015 में नेपाल में आए भूकंप में भी उन्होंने आम लोगों की काफी मदद की थी।

विनोद के दादा भूरामल दास चौधरी राजस्थान से जाकर नेपाल में बस गए थे। 20 साल की उम्र में उन्होंने कपड़ों का कारोबार शुरू किया था। 1934 में आए भूकंप के बाद उन्होंने नेपाल में कपड़ों की पहली ऐसी कंपनी शुरू की थी जो कि रजिस्टर्ड थी। विनोद खुद को अमिताभ बच्चन और रणबीर कपूर का फैन बताते हैं। उनके मुताबिक, उनके जीवन पर दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला और उद्योगपति जेआरडी टाटा का भी काफी प्रभाव है।

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