योगी सरकार का महिला नेतृत्व की क्षमता, संवेदनशीलता और प्रशासनिक दक्षता पर पूरा भरोसा 

उत्तर प्रदेश प्रशासन में बढ़ती महिला शक्ति

डीएम से लेकर तमाम मुख्य पदों पर तैनात हैं महिलाएं 

उमेश चन्द्र त्रिपाठी 

लखनऊ! योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक संरचना में महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रूप से बढ़ती दिखाई दे रही है। शासन और जिलास्तरीय प्रशासन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां महिला अधिकारियों को सौंपे जाने से यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि राज्य सरकार महिला नेतृत्व की क्षमता, संवेदनशीलता और प्रशासनिक दक्षता पर पूरा भरोसा जता रही है। 

प्रदेश के प्रमुख शहरी जिले गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) की कानून व्यवस्था की कमान आईपीएस अधिकारी लक्ष्मी सिंह संभाल रही हैं, जो राज्य की पहली महिला पुलिस कमिश्नर होने के कारण प्रशासनिक नेतृत्व का मजबूत उदाहरण मानी जाती हैं। खनन विभाग की निदेशक एवं सचिव माला श्रीवास्तव के पास विभागीय संचालन की पूर्ण जिम्मेदारी है और उल्लेखनीय है कि उनके विभाग में प्रमुख सचिव का पद रिक्त है। इसी तरह खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की मुखिया रोशन जैकब के विभाग में भी प्रमुख सचिव की तैनाती नहीं है, फिर भी विभागीय कार्य सुचारु रूप से संचालित हो रहे हैं।

शिक्षा क्षेत्र में मोनिका रानी को बेसिक शिक्षा महानिदेशक की अहम जिम्मेदारी दी गई है, जबकि परिवहन व्यवस्था की कमान परिवहन आयुक्त किंजल सिंह के हाथों में है। सचिव स्तर पर पिंकी जावल, रितु माहेश्वरी, सारिका मोहन और डिम्पल वर्मा को महत्वपूर्ण विभागीय दायित्व सौंपे गए हैं। हाल ही में पदोन्नत अपर्णा यू को राजस्व विभाग का प्रमुख सचिव बनाया जाना भी महिला नेतृत्व पर बढ़ते भरोसे का संकेत माना जा रहा है। 

जिलास्तरीय प्रशासन में भी महिला अधिकारियों की मजबूत उपस्थिति दर्ज हो रही है। वर्तमान में प्रदेश के 12 जिलों की कमान महिला जिलाधिकारियों के हाथों में है। इनमें दुर्गा शक्ति नागपाल लखीमपुर खीरी, श्रुति सिंह बुलंदशहर, जसजीत कौर बिजनौर, दिव्या मित्तल देवरिया, प्रियंका निरंजन गोंडा, हर्षिता माथुर रायबरेली, मेधा रूपम गौतम बुद्ध नगर, कृतिका ज्योत्स्ना बस्ती, अस्मिता लाल बागपत, निधि गुप्ता वत्स अमरोहा, जे रीभा बांदा तथा गजल भारद्वाज महोबा में प्रशासनिक जिम्मेदारी संभाल रही हैं।

राजनीतिक और प्रशासनिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला अधिकारियों को शीर्ष प्रशासनिक जिम्मेदारियां सौंपने से शासन में संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूती मिलती है। 

उत्तर प्रदेश में बढ़ती महिला भागीदारी यह संकेत देती है कि प्रशासनिक व्यवस्था में संतुलित नेतृत्व को प्राथमिकता दी जा रही है। स्पष्ट रूप से कहा जाए तो राज्य सरकार का यह कदम केवल प्रतिनिधित्व बढ़ाने का प्रयास नहीं बल्कि प्रशासनिक ढांचे को अधिक प्रभावी और उत्तरदायी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। महिलाओं पर बढ़ता भरोसा उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक संस्कृति में सकारात्मक बदलाव का संकेत बनकर उभर रहा है।

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