हिंदू जीवन पद्धति केवल धार्मिक अभ्यास नहीं, वैज्ञानिक सोच भी है- विनय यादव अध्यक्ष राष्ट्रीय एकता अभियान नेपाल
मनोज कुमार त्रिपाठी
काठमांडू, असार 14 (28 जून) ! सीमा जागरण मंच के अखिल भारतीय सदस्य तथा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. चित्रेश सोनी की उपस्थिति में “हिंदू जीवन दर्शन” विषय पर एक भव्य उद्बोधन कार्यक्रम काठमांडू में सम्पन्न हुआ।
इस कार्यक्रम में हिंदू सभ्यता, दर्शन और वर्तमान वैश्विक संदर्भ में इसके व्यवहारिक पक्ष पर विस्तृत चर्चा की गई। इसमें सामाजिक, राजनीतिक एवं शैक्षिक क्षेत्र से जुड़ी कई विशिष्ट हस्तियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय एकता अभियान के केंद्रीय अध्यक्ष विनय यादव ने की। अपने संबोधन में अध्यक्ष यादव ने कहा कि हिंदू जीवन पद्धति केवल एक धार्मिक अभ्यास नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समरसता, वैज्ञानिक सोच और मानवीय मूल्यों का मार्गदर्शक भी है। उन्होंने अभियान द्वारा संचालित राष्ट्रहित से जुड़े कार्यक्रमों को और मजबूती से आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित पूर्व मंत्री रामेश्वर राय यादव ने हिंदू दर्शन को नेपाली समाज की नैतिक रीढ़ की हड्डी बताते हुए कहा कि वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक भ्रम की स्थिति में यह दर्शन मार्गदर्शन करने में सक्षम है। उन्होंने हिंदू जीवन पद्धति और राष्ट्रवाद के आपसी संबंध पर भी अपने गहरे विचार साझा किए।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में माननीय रुक्मिणी चौधरी, जनमत पार्टी के केंद्रीय उपाध्यक्ष इंजीनियर दीपक शाह, सह-प्राध्यापक संजय पटेल, संपादक दिनेश डीसी सहित कई सामाजिक अग्रणी व्यक्तियों ने भी अपने विचार रखते हुए हिंदू दर्शन की वैज्ञानिकता, वैश्विक स्वीकार्यता और युवाओं में इसके पुनर्जागरण की आवश्यकता पर जोर दिया।

स्वागत भाषण चंद्र यदुवंशी ने दिया, जबकि कार्यक्रम का उद्देश्य, डॉ. सोनी के योगदान और अभियान की वर्तमान गतिविधियों की संक्षिप्त जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय एकता अभियान के युवा विभाग संयोजक दिवस पटेल ने किया। उन्होंने हिंदू दर्शन के प्रति युवाओं के बढ़ते आकर्षण और इसे व्यवहारिक शिक्षा के रूप में स्थापित करने की अभियान की रणनीति प्रस्तुत की।
इस अवसर पर अभियान के केंद्रीय सदस्य लक्ष्मी ज्ञवाली, रीता शाह, कलानंद मिश्र, जय नारायण यादव, धर्मेंद्र यादव सहित कई अन्य लोगों की उपस्थिति रही।
सभा कक्ष विचार-विमर्श और भावनात्मक अभिव्यक्तियों से भरा रहा, जिसमें उपस्थित लोगों ने हिंदू जीवन पद्धति की गहराई से जानकारी प्राप्त की।
इस कार्यक्रम ने न केवल हिंदू जीवन दर्शन के प्रति जनचेतना को बढ़ाया, बल्कि सामाजिक एकता का संदेश भी प्रसारित किया ऐसा प्रतिभागियों का मत था।



