मनोज कुमार त्रिपाठी
काठमांडू! नेपाल के पूर्व मंत्री महेंद्र यादव ने भारत और नेपाल की मित्रता के लिए रामायण सर्किट अहम मुकाम है। हम दो देश हैं, लेकिन हमारी मित्रता आज की नहीं बल्कि त्रेता युग की है। उन्होंने कहा कि नेपाल और भारत का पारिवारिक और रोटी- बेटी का रिश्ता है जो सदियों से चला आ रहा है। यह रिश्ता इतना प्रगाढ़ है जिसे कभी अल नहीं किया जा सकता है। नेपाल के पूर्व मंत्री श्री महेन्द्र यादव द इंडिया एक्सप्रेस न्यूज के डायरेक्टर मनोज कुमार त्रिपाठी से काठमांडू में एक्सक्लूसिव बातचीत के दौरान उक्त बातें कही।

भगवान बुद्ध की जन्मभूमि लुंबिनी की महिमा को बताते हुए श्री यादव ने कहा कि भारत-नेपाल को भाषा, आस्था, अपनापन और रोटी-बेटी का रिश्ता एक सूत्र में बांधता है। मां जानकी के बिना राम का अयोध्या अधूरा है। हमारी माता, प्रकृति, संस्कृति, आस्था और प्रार्थना एक है। हमारी राह, मंसूबे और मंजिल भी एक हैं। नेपाल के बिना भारत की आस्था और विश्वास अधूरा है। इतिहास भी अधूरा है।
उन्होंने कहा कि मां जानकी की पवित्र भूमि और आसपास के इलाके का विकास जरूरी है । उन्होंने कहा कि भारत रामायण सर्किट में उन सभी स्थलों को जोड़ रहा है, जहां-जहां भगवान राम के चरण पड़े थे। रामायण सर्किट के विकास से पर्यटन का विकास होगा और नेपाल और भारत के युवाओं को रोजगार मिलेगा।

उन्होंने कहा कि नेपाल और भारत की संस्कृति एक है। राम-सीता, बुद्ध-महावीर, रामेश्वरम-पशुपतिनाथ सभी एक-दूसरे के पूरक हैं।
भारत-नेपाल हर मुश्किल में एक दूसरे के साथ
उन्होंने कहा भारत और नेपाल हर मुश्किल में एक-दूसरे के साझेदार रहे हैं और आगे भी रहेंगे।
उन्होंने कहा कि नेपाल और भारत की धरती ने यह दिखाया है कि यहां बेटी को सम्मान दिया जाता है। नारी सशक्तीकरण की पहचान हैं सीता। उन्होंने गार्गी और अष्टावक्र के राजा जनक के दरबार में होने को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि राजा जनक विदेह कहे जाते थे। यह उनकी प्रजा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। नेपाल और भारत का संबंध राजनीति की सीमा से नहीं बांधा जा सकता। बल्कि यह प्रेम नीति से बना है। उन्होंने कहा कि सरकारें आती-जाती रहेंगी लेकिन हमारा संबंध अटूट रहेगा। काठमांडू से कन्याकुमारी तक एक ही संस्कृति बहती है।

