नेपाली प्रतिनिधि सभा के सदस्य व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शेखर कोइराला अध्यक्ष पद के प्रमुख दावेदार?

नेपाल की राजनीति में लंबे समय तक रहा कोइराला परिवार का वर्चस्व

उमेश चन्द्र त्रिपाठी

काठमांडू! नेपाल की राजनीति में कभी कोइराला परिवार का दबदबा था। राजा शासन से लेकर लोकतंत्र बहाली तक इस परिवार के चार प्रधानमंत्री हुए। कहना न होगा कि एक ही वंश के चारों प्रधानमंत्रियों का मिजाज भिन्न था और सभी की कार्यशैली भी अलहदा थी।

 

वैसे तो कोइराला जाति से कान्यकुब्ज ब्राह्मण होते हैं। चूंकि यह परिवार पहाड़ का निवासी है इसलिए इन्हें पहाड़ी ब्राह्मण भी कहा जाता है। राजशाही के जमाने में इस परिवार के पहले प्रधानमंत्री मातृका प्रसाद कोइराला हुए। मातृका प्रसाद 16 नवंबर 1951 से 14 अगस्त 1952 और फिर 15 जून 1953 से 11 अप्रेल 1955 तक ऐसे समय प्रधानमंत्री रहे जब राजशाही अपने निरंकुशता के चरम पर था। कोइराला परिवार के यह पहले ऐसे प्रधानमंत्री थे जो बस नाम के प्रधानमंत्री थे लेकिन उसके बाद जब इनके छोटे भाई वीपी कोइराला प्रधानमंत्री बने तो कहना न होगा, उन्होंने तत्कालीन नरेश महेंद्र के नाक में दम कर दिया। वे मात्र 18 माह ही प्रधानमंत्री रहे लेकिन इनके इस कार्यकाल को लोकतंत्र की स्थापना काल के रूप में याद किया जाता है।

गिरजा प्रसाद कोइराला पूर्व प्रधानमंत्री नेपाल

प्रधानमंत्री वीपी कोइराला अपेक्षाकृत लोकतांत्रिक

प्रधानमंत्री वीपी कोइराला अपेक्षाकृत लोकतांत्रिक थे। इसीलिए उनकी राजा महेन्द्र से लंबे समय तक टकराव चला। बहुदलीय लोकतंत्र की लड़ाई में उन्हें 18 महीने जेल में रहना पड़ा। वे कई महीनों तक भूमिगत भी रहे। उन्हें निर्वासित जीवन भी व्यतीत करना पड़ा। वीपी कोइराला नेपाल के ऐसे प्रधानमंत्री थे जिन्होंने 1960 में ही राजशाही की चूलें हिलाकर रख दी थी। उनका जीवन अधिकांशतः जेल, निर्वासन और बीमारियों से जूझते हुए बीता।

वीपी कोइराला के बाद इनके छोटे भाई गिरिजा प्रसाद कोइराला प्रधानमंत्री हुए। वे नेपाल के चार बार प्रधानमंत्री थे। उन्होंने राजशाही के वक्त का नेपाल और लोकतान्त्रिक नेपाल दोनों को करीब से देखा। वे 1991 से लेकर 2008 यानि लोकतंत्र बहाली तक नेपाल के प्रधानमंत्री रहे। वे लंबे समय तक पार्टी के अध्यक्ष भी रहे। गिरिजा प्रसाद कोइराला को नेपाल का महात्मा गांधी भी कहा गया है। वे स्वर्गीय नरेश वीरेंद्र विक्रम शाह के काफी करीब रहे। वे सदैव ही भारत-नेपाल के बीच प्रगाढ़ संबंध के हिमायती रहे। गिरिजा प्रसाद कोइराला का भारत से भी नजदीक का संबंध रहा है। स्वर्गीय गिरिजा प्रसाद कोइराला का मिजाज अपने बड़े भाई वीपी कोइराला से भिन्न रहा। लोकतांत्रिक नेपाल का समर्थक होते हुए भी इनका तेवर राजा के प्रति कभी आक्रामक नहीं रहा। नेपाल की राजनीति में गिरिजा प्रसाद कोइराला के शांत स्वभाव के नाते इन्हें लोग प्यार से गिरिजा बाबू भी कहते थे।

सुशील कोइराला पूर्व प्रधानमंत्री नेपाल

गिरिजा प्रसाद कोइराला के बाद 2014 में सुशील कोइराला नेपाल के 37 वें और लोकतान्त्रिक नेपाल के छठवें प्रधानमंत्री हुए। सुशील कोइराला गिरिजा प्रसाद कोइराला के बूआ के लड़के थे। इस तरह इन्हें भी कोइराला परिवार के सदस्य के रूप में जाना जाता है। उनकी पहचान वरिष्ठ राजनितिज्ञ और लोकतान्त्रिक योद्धा के रूप में है। वे पार्टी के अध्यक्ष भी थे। प्रधानमंत्री रहते हुए उनके सादगी चर्चा खूब रही। वे सरकारी खजाने का एक भी पैसा अपनी सुविधाओं पर कभी नहीं खर्च किए। नेपाल के लोगों को उस समय घोर आश्चर्य हुआ जब 2015 में नया संविधान लागू होने के बाद हुए आम चुनाव में उन्हें मौजूदा प्रधानमंत्री व एमाले नेता केपी शर्मा ओली से हार जाना पड़ा। चुनाव हारने के कुछ दिन बाद ही फेफड़े के संक्रमण की वजह से उनका निधन हो गया। सुशील कोइराला का मानना था कि नेपाल जैसे गरीब देश में केवल व्यक्तिगत आजादी और राजनीतिक अधिकारों की गारंटी ही पर्याप्त नहीं है। वे कहते थे कि लोकतांत्रिक समाजवाद ही नेपाल के पिछड़े पन का समाधान है।

कोइराला परिवार के अंतिम शख्सियत सुशील कोइराला के बाद इस परिवार मे राजनीतिक शून्यता आ गई है। आज इस परिवार के एक मात्र सदस्य शेखर कोइराला नेपाल की राजनीति में सक्रिय हैं और नेपाली कांग्रेस में अपनी हैसियत बढ़ाने को संघर्षरत भी हैं। शेखर कोइराला पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय गिरिजा प्रसाद कोइराला के चचेरे भाई हैं।

शेखर कोइराला वर्तमान में प्रतिनिधि सभा के सदस्य हैं।

नेपाल में मौजूदा ओली सरकार नेपाली कांग्रेस के साथ गठबंधन में है। शेखर कोइराला के हाल ही ओली सरकार पर जमीन कब्जाने संबंधी बयान से ओली सरकार असहज हुई है।

शेखर कोइराला कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व सांसद नेपाल

नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर भी कोइराला परिवार का कब्जा रहता था। इस परिवार के सुशील कोइराला नेपाली कांग्रेस के आखिरी अध्यक्ष रहें हैं। इस समय इस पार्टी के अध्यक्ष पूर्व पीएम शेर बहादुर देउबा हैं। नेपाल की राजनीति में चर्चा है कि शेखर कोइराला पार्टी के अध्यक्ष पद को हासिल करने की चाह रखते हैं ताकि नेपाली कांग्रेस पर एक बार फिर कोइराला परिवार का वर्चस्व कायम हो सके।

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