नेपाल में बवाल के बीच बॉर्डर पर सुरक्षा चाक-चौबंद SSB ने तैनात किए अतिरिक्त जवान और सर्विलांस

रूपंदेही जिले में सुरक्षा चाक-चौबंद, स्थित सामान्य, प्रदीप बहादुर क्षेत्री एसपी

मनोज कुमार त्रिपाठी

महराजगंज! नेपाल में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सरकारी पाबंदी और भ्रष्टाचार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। Gen-Z सड़क पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी बीच भारत ने नेपाल बॉर्डर पर SSB के जरिए चौकसी और सर्विलांस बढ़ा दी है।

 

 

नेपाल की मौजूदा स्थिति को देखते हुए भारत-नेपाल सीमा पर चौकसी बढ़ा दी गई है। सूत्रों के अनुसार SSB (सशस्त्र सीमा बल) ने सीमा पर अतिरिक्त टूप्स और सर्विलांस तैनात किए हैं। भारत-नेपाल बॉर्डर की सुरक्षा SSB के जिम्मे है और हालात को देखते हुए निगरानी और भी कड़ी कर दी गई है। नेपाल में हाल के दिनों में भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर रोक के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

खासतौर पर Gen-Z के युवा इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। यह विरोध पहले डिजिटल प्लेटफॉर्म्स तक सीमित था, लेकिन अब सड़कों पर उतर आया है।

 

 

सोमवार सुबह 9 बजे से ही राजधानी काठमांडू के माइतीघर इलाके में प्रदर्शनकारियों ने जमा होकर सरकार के फैसले के खिलाफ आवाज बुलंद की। इस बीच सेना नेपाल सरकार ने कर्फ्यू लगा दिया है, और सड़क पर आर्मी को तैनात कर दिया है।

प्रदर्शन का आयोजन ‘हामी नेपाल’ समूह ने किया था, जिसे पहले ही काठमांडू जिला प्रशासन कार्यालय से मंजूरी मिल चुकी थी। समूह के चेयरपर्सन सुधन गुरूंग ने कहा कि यह विरोध सरकार की कार्यप्रणाली और भ्रष्टाचार के खिलाफ है और देशभर में ऐसे प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं

आयोजक सोशल मीडिया का उपयोग रूट और सुरक्षा संबंधी जानकारी साझा करने के लिए कर रहे हैं और छात्रों से कहा गया है कि वे यूनिफॉर्म में किताबों के साथ इन प्रदर्शनों में शामिल हों।

नेपाल सरकार ने हाल ही में डायरेक्टिव्स फॉर मैनेजिंग द यूज ऑफ सोशल नेटवर्क्स 2023 के तहत उन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर रोक लगा दी है जो निर्धारित समय सीमा में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी मंत्रालय के साथ रजिस्ट्रेशन नहीं करा पाए।

बुधवार रात समय सीमा खत्म हो गई, लेकिन फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, यूट्यूब, एक्स (पूर्व में ट्विटर), रेडिट और लिंक्डइन जैसी बड़ी कंपनियों ने आवेदन नहीं किया। इसके उलट चीनी कंपनी टिकटॉक, वाइबर, विटक, निंबज और पोपो लाइव पहले ही सूचीबद्ध हो चुके हैं, जबकि टेलीग्राम और ग्लोबल डायरी ने आवेदन किया है और स्वीकृति की प्रतीक्षा में हैं।

 

यह कदम नेपाल सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद उठाया गया है, जिसमें कहा गया था कि घरेलू और विदेशी सभी ऑनलाइन और सोशल प्लेटफॉर्म्स का आधिकारिक पंजीकरण जरूरी है ताकि अनचाहे कंटेंट पर निगरानी रखी जा सके। मंत्रालय ने कंपनियों को 28 अगस्त से सात दिन का समय दिया था। इन हालातों ने नेपाल की सड़कों पर गुस्से का माहौल खड़ा कर दिया है और भारत ने सावधानी बरतते हुए अपनी सीमा सुरक्षा और चौकसी को और मजबूत कर दिया है। इधर सोनौली बार्डर पर भी सशस्त्र सीमा बल के जवान और स्थानीय पुलिस पूरी तरह से चाक-चौबंद हैं।

नेपाली सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश कुमार त्रिपाठी और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के नेता प्रज्वल बोहरा ने अपने अलग अलग वक्तव्य में कहा है कि सरकार ने जो कदम उठाया है वह जनहित में नहीं है। दमनकारी नीतियों से देश नहीं चलता है। प्रदर्शनकारियों पर अश्रुगैस, लाठियां और अंधाधुंध गोलियां बरसाई गई जिसमें काफी लोग मारे गए हैं कई लोग घायल हैं जिनका इलाज चल रहा है। मृतकों की संख्या और भी बढ़ सकती है। जनता में सरकार के प्रति भारी आक्रोश व्याप्त है। काठमांडू में अभी भी स्थित पूरी तरह से भयावह है। लोग डरे और सहमें हुए हैं। सरकार को प्रदर्शनकारियों से वार्ता कर तुरंत इस समस्या का समाधान करना चाहिए।

नेपाल के हालात को देखते हुए सोनौली बार्डर पर एसएसबी 22 वाहिनी के इंस्पेक्टर अरूण कुमार पांडे और चौकी प्रभारी सोनौली बृजराज यादव के नेतृत्व में पुलिस और एसएसबी के जवानों द्वारा सीमा पर पैदल गश्त और पेट्रोलिंग किया जा रहा है।

 

 

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