तीन दिनों में अरबों रुपए का हुआ राजस्व का नुकसान
मनोज कुमार त्रिपाठी
सोनौली महराजगंज!नेपाल और भारत के बीच व्यापारिक रिश्ते सदियों पुराने हैं। नेपाल अपनी ज़रूरत की ज्यादातर चीजें भारत से ही आयात करता है। दवाओं, पेट्रोलियम उत्पादों, मशीनों से लेकर चावल और सब्ज़ियों तक भारत से होने वाली सप्लाई नेपाल की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। लेकिन काठमांडू में जेनरेशन जेड (Gen Z) के हिंसक विरोध प्रदर्शनों और सरकार गिरने के बाद स्थिति बदल गई है। राजनीतिक अस्थिरता और विरोध प्रदर्शनों की वजह से सीमा पार व्यापार पर गहरा असर पड़ा है।

पहले ये आंदोलन सोशल मीडिया बैन के खिलाफ शुरू हुए थे, लेकिन बाद में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और खराब शासन जैसे मुद्दों पर केंद्रित हो गए। इसके चलते बॉर्डर पर ट्रकों की लंबी कतारें लग गई हैं और सप्लाई चैन बुरी तरह प्रभावित हुई है। दवाओं, मशीनों, कृषि वस्तुओं और पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई में रुकावटें आ रही हैं। सुरक्षा के कड़े इंतजामों और बार-बार की जांच से व्यापार बेहद धीमा हो गया है।
सीमा पर खड़े सैकड़ों ट्रक ड्राइवरों और कारोबारियों की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं। आजमगढ़ के रहने वाले और चंदौली ज़िले के चंदासी से माल लेकर नेपाल जा रहे बुलंद यादव ने स्थिति का दर्द बयान करते हुए कहा कि “हम लोग 9–10 दिन से यहीं लाइन में फंसे हुए हैं। गाड़ियां भंसार में पहुंच चुकी हैं लेकिन वहां विवाद खड़ा कर दिया गया है। अब गाड़ी कितने दिन खड़ी रहेगी, पता नहीं। खाने-पीने और पैसों की भारी दिक्कत हो रही है। गाड़ियां चालू भी नहीं हो रही हैं। हमारी मांग यही है कि अगर नेपाल में सुरक्षित प्रवेश संभव नहीं है तो हमें वापस इंडिया भेज दिया जाए, या फिर गाड़ियां सुरक्षित तरीके से नेपाल तक पहुंचा दी जाएं।
बुलंद यादव की तरह कई अन्य ड्राइवर और कारोबारी सीमा पर फंसे हुए हैं। निवेशकों में भी डर का माहौल है, जिससे नेपाल की आर्थिक गतिविधियां कम हो रही हैं। इससे न केवल नेपाल के उद्योग प्रभावित होंगे, बल्कि भारत के व्यापारिक हितों को भी नुकसान हो सकता है। बड़े प्रोजेक्ट्स और निवेश समझौतों पर भी अनिश्चितता मंडरा रही है।
हालांकि, भारत सरकार नेपाल की आर्थिक और मानवीय जरूरतों को पूरा करने की कोशिश कर रही है। सीमा पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है ताकि व्यापार और लोगों का आना-जाना सुरक्षित रहे। वहीं, वहां फंसे भारतीय नागरिकों के लिए सुरक्षा संबंधी एडवाइजरी भी जारी की गई है। लेकिन जब तक नेपाल में स्थिरता नहीं लौटती, तब तक दोनों देशों के बीच यह व्यापारिक संकट और गहराने की आशंका बनी रहेगी।