मनोज कुमार त्रिपाठी
नेपाल में सुशीला कार्की को प्रधानमंत्री बनाए जाने की अटकलों ने सियासत को गर्मा दिया है। समाजसेवी ऋषि राम चापागाई ने कहा कि यदि संसद को भंग किए बिना सुशीला कार्की को प्रधानमंत्री बनाया गया, तो नेपाल एक और राजनीतिक संकट की ओर बढ़ सकता है। उनका मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम में भारत की भूमिका बेहद अहम रहेगी, जिससे दोनों देशों के हित सुरक्षित रह सकें।
चापागाई ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में सिर्फ आंदोलन या युवाओं का आक्रोश ही काफी नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि आंदोलनकारियों को पत्रकारों, अधिवक्ताओं और संवैधानिक विशेषज्ञों की सलाह लेकर आगे बढ़ना चाहिए। उनका कहना है कि भ्रष्टाचार, शहीद परिवारों के न्याय और बेरोजगारी जैसे गंभीर मुद्दों पर ठोस समाधान निकाले बिना नेपाल की दिशा तय नहीं होगी।
आने वाली सरकार को लेकर उन्होंने साफ राय रखी कि उसका एजेंडा स्पष्ट होना चाहिए। भ्रष्टाचार उन्मूलन, उद्योग-धंधों का संचालन, बेरोजगारी का समाधान और शहीदों की क्षतिपूर्ति जैसे मुद्दों पर प्राथमिकता दी जानी चाहिए। चापागाई ने जोर देकर कहा कि पुराने राजनीतिक दलों और नेताओं को हटाकर नई नियुक्तियां करनी होंगी, तभी नेपाल में आमूलचूल परिवर्तन संभव हो सकेगा।