सनातन एकता का मंच बना गोरखपुर शहर
मनोज कुमार त्रिपाठी
गोरखपुर में 14 नवंबर 2025, शुक्रवार को विश्व हिंदू महासंघ का भव्य अधिवेशन अत्यंत गरिमा, अनुशासन और सांस्कृतिक गौरव के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ 16:00 बजे ध्वजारोहण से हुआ, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती अस्मिता भंडारी, मीना देवी क्षेत्री शर्मा (बांग्लादेश), श्रीमती राजू मल्ल (यूनाइटेड किंगडम), डॉ. परमिंदर सिंह, शांतनु कुमार (थाईलैंड), लेखनाथ वस्तोला (ऑस्ट्रेलिया), डॉ. चंद्रदेव (अमेरिका), श्रीमती शोभा मास्के (नेपाल), श्री भोलानाथ दाहाल (नेपाल), श्री विक्रम गोस्वामी और योगी तेजपाल सिंह (भारत) की प्रमुख उपस्थिति रही।

ध्वज गान का संचालन डॉ. राकेश श्रीवास्तव, प्रदेश अध्यक्ष सांस्कृतिक ने किया। इसके उपरांत दीप प्रज्ज्वलन की परंपरा श्रद्धेय संतों और विशिष्ट अतिथियों द्वारा निभाई गई, जिनमें श्रद्धेय नारायण गिरि जी, आचार्य कृष्ण विश्रुत पाणि, बाईसा करिश्मा हाड़ा, डॉ. हरिओम पाठक, योगमाया राधिकापुरी, डॉ. रमणपुरी, सत्यानंद गिरि, सद्गुरु आदियोगी, तथा चारू चौधरी (उपाध्यक्ष, महिला आयोग) सम्मिलित थीं। इससे पूरे वातावरण में सांस्कृतिक ऊर्जा और आध्यात्मिकता का संचार हुआ।


इसके बाद मंचासीन अतिथियों का माल्यार्पण किया गया, जिसके बाद श्री भिखारी प्रजापति, प्रदेश अध्यक्ष ने सभी उपस्थित राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों का परिचय कराया। कार्यक्रम के दौरान अतिथिगणों ने अपने प्रेरणादायी आशीर्वचन दिए, जिनमें सनातन संस्कृति के संरक्षण, वैश्विक भारतीय समुदाय की भूमिका और सामाजिक एकता पर महत्वपूर्ण संदेश प्रस्तुत किए गए। सभी वक्ताओं ने कहा कि विश्व हिंदू महासंघ द्वारा किया जा रहा यह प्रयास सांस्कृतिक मजबूती की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।


कार्यक्रम के अगले चरण में डॉ. हरिओम पाठक, प्रदेश अध्यक्ष धर्माचार्य ने सभी अतिथियों और पदाधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इसके बाद पराक्रम पत्रिका का विधिवत विमोचन किया गया, जिसमें संगठन की गतिविधियों, उपलब्धियों और आगामी योजनाओं का विस्तृत विवरण शामिल है। विमोचन के दौरान उपस्थित अतिथियों ने इसे संगठन के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया।


अधिवेशन का समापन 17:45 बजे लघु जलपान के साथ हुआ, जहां देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों ने एक-दूसरे से संवाद किया और भविष्य की योजनाओं पर विचार साझा किए। यह पूरा आयोजन गोरखपुर में सनातन एकता, सांस्कृतिक जागरण और विश्व हिंदू समाज के वैश्विक नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक अवसर साबित हुआ।














