मनोज कुमार त्रिपाठी
स्यांगजा नेपाल!
उत्तर गंडकी के तट पर आयोजित दामोदर धर्म उत्सव का इस वर्ष 24 वां संस्करण बड़े ही हर्षोल्लास पूर्वक और भव्य रूप में मनाया गया। एक महीने तक चले इस उत्तर गंडकी महोत्सव में न केवल नेपाल बल्कि भारत सहित अमेरिका, इंग्लैंड, भूटान, बर्मा और अन्य कई देशों से श्रद्धालुओं ने भाग लिया।


महोत्सव के आयोजक गुरुजी ने बताया कि गंडकी नदी संसार में एकमात्र ऐसी पवित्र धारा है जहां से भगवान सालग्राम की प्राप्ति होती है, जिन्हें विश्वभर के सनातनी पूजते हैं। यही कारण है कि इस क्षेत्र को “सालग्राम जननी भूमि” कहा जाता है। गंडकी नदी यहां उत्तरवाहिनी होकर लगभग साढ़े तीन किलोमीटर तक प्रवाहित होती है, जो अपने आप में अद्वितीय धार्मिक महत्ता रखती है।
उन्होंने बताया कि इस महोत्सव का उद्देश्य संसार भर के सालग्राम उपासकों को एक मंच पर लाना, तथा भगवान सालग्राम और उनकी जननी गंडकी मैया का मिलन कराना है। इस आयोजन के माध्यम से सनातन धर्म की एकता और परंपरा का प्रसार किया जा रहा है।
इस अवसर पर भारत और नेपाल के अनेक संत-महंत, महामंडलेश्वर और आचार्यगण उपस्थित हुए। यद्यपि जैन जी आंदोलन के चलते कुछ प्रमुख संतों को अनुमति नहीं मिल सकी, फिर भी नेपाल के प्रमुख जगद्गुरुओं और भारत के वरिष्ठ संतों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक बना दिया।
कार्यक्रम में वैष्णव, शैव, शाक्य, गणपत्य सभी परंपराओं के संतों ने सहभागिता की।


चैतन्य आचार्य गुरुजी ने कहा कि यह महोत्सव न केवल एक धार्मिक उत्सव है, बल्कि सांस्कृतिक एकता और आस्था का प्रतीक है, जिसने गंडकी तट को पुनः सनातन धर्म के केंद्र के रूप में प्रतिष्ठित किया है।
तिलोत्तमा एवरेस्ट कत्था मिल्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रोप्राइटर बसंत रोक्का द्वारा आयोजन समिति को 50 हजार रुपए का सहयोग राशि प्रदान किया गया। आयोजन समिति ने बसंत रोक्का को प्रशस्ति-पत्र और मनोज कुमार त्रिपाठी को पुस्तक देकर सम्मानित किया गया।



