मायादेवी मंदिर से छेड़छाड़ का आरोप, अकरम खान बोले — प्राचीन आस्था से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
लुम्बिनी में प्रशासनिक मनमानी और भ्रष्टाचार का आरोप, लुम्बिनी बचाओ महाअभियान ने सरकार को घेरा
लुम्बिनी मुद्दे पर मीडिया की चुप्पी पर सवाल- अकरम खान बोले, चौथा स्तंभ अपनी भूमिका निभाए
मनोज कुमार त्रिपाठी
लुम्बिनी! लुम्बिनी बचाओ महाअभियान के संयोजक अकरम खान ने विश्व धरोहर लुम्बिनी में सनातन आस्था, ऐतिहासिक परंपराओं और धार्मिक अधिकारों के साथ हो रहे कथित खिलवाड़ पर तीखा विरोध दर्ज कराया है।

अकरम खान ने कहा कि लुम्बिनी केवल बौद्ध आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों की भी आस्था का स्थल है, जहां मायादेवी को देवी स्वरूप में मानकर सदियों से पूजा-पाठ होता रहा है।
उन्होंने कहा कि लगभग 18 वर्षों तक तेल, कपूर, अगरबत्ती और चेनोल जैसी पूजन सामग्री पर रोक लगाई गई थी। लुम्बिनी विकास कोष के खिलाफ लंबे संघर्ष के बाद लुम्बिनी बचाओ महाअभियान ने यह धार्मिक अधिकार पुनः बहाल कराया, जिसे उन्होंने सनातन समाज की बड़ी जीत बताया।
अकरम खान ने आरोप लगाया कि मायादेवी मंदिर को तोड़ा गया और उसके मूल स्वरूप में बदलाव किया गया, जो पूरी तरह अस्वीकार्य है।
उन्होंने कहादुनिया में कहीं भी किसी प्राचीन मंदिर या धार्मिक स्थल को तोड़ा नहीं जा सकता, केवल उसका संरक्षण या नवीनीकरण किया जा सकता है। मंदिर का स्वरूप बिगाड़ना धार्मिक भावनाओं पर सीधा हमला है।उन्होंने इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई और जेल भेजने की मांग की
मुंडन स्थल हटाने का घोर विरोध
अकरम खान ने कहा कि सदियों पुराने मुंडन स्थल को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की योजना हिंदू आस्था पर चोट है। उन्होंने बताया कि आसपास के कई जिलों के हिंदुओं की मान्यता है कि लुम्बिनी में मुंडन कराना शुभ माना जाता है।
“इस ऐतिहासिक और आस्थागत स्थल का विस्थापन किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा,” उन्होंने दो टूक कहा।

ADB की ई-गाड़ियों का दुरुपयोग
अकरम खान ने ADB द्वारा उपलब्ध कराई गई ई-गाड़ियों के कथित दुरुपयोग का मुद्दा उठाते हुए कहा कि ये गाड़ियां पर्यटकों के लिए थीं, लेकिन पदाधिकारी इन्हें निजी उपयोग में चला रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि छह महीने बीत जाने के बावजूद न तो कोई स्पष्ट नियम बनाया गया और न ही व्यवस्था पारदर्शी की गई।
ककरहवा बॉर्डर पर टूरिस्ट टैक्सियों पर रोक
भारत–नेपाल सीमा के ककरावा बॉर्डर को लेकर अकरम खान ने सवाल उठाते हुए कहा कि नेपाल की ओर से सभी वैधानिक प्रावधान पूरे होने के बावजूद भारत की ओर से SSB द्वारा टूर एंड ट्रैवल टैक्सियों को रोका जा रहा है।
उन्होंने कहा, “प्राइवेट गाड़ियां आ-जा रही हैं, लेकिन टैक्सी पास गाड़ियां रोकी जा रही हैं, जिससे पर्यटन और स्थानीय व्यापार प्रभावित हो रहा है।”

मीडिया की भूमिका पर भी उठाए सवाल
अकरम खान ने मीडिया की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि लुम्बिनी बचाओ महाअभियान ने हर मुद्दा पूरे प्रमाणों के साथ उठाया, इसके बावजूद स्थानीय और मुख्यधारा मीडिया ने इन विषयों को गंभीरता से नहीं लिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि कई पत्रकार और बड़े मीडिया संस्थान राजनीतिक दबाव के कारण सरकार के खिलाफ खुलकर आवाज नहीं उठाते, जबकि मीडिया देश का चौथा स्तंभ है।
सदस्य सचिव की नियुक्ति का बहिष्कार
अकरम खान ने बताया कि लुम्बिनी विकास कोष के नव-नियुक्त सदस्य सचिव दीपक श्रेष्ठ का लुम्बिनी बचाओ महाअभियान ने विरोध किया है।
उन्होंने कहा कि जनविरोध और मीडिया में खबरें आने के बावजूद सरकार ने उनकी नियुक्ति की, इसलिए अभियान ने दीपक श्रेष्ठ के बहिष्कार की घोषणा की है।
अंत में अकरम खान ने भारत सरकार, नेपाल सरकार और संबंधित सभी निकायों से मांग की कि सनातन आस्था, ऐतिहासिक स्थलों और पर्यटन व्यवस्था से जुड़े इन सभी मुद्दों पर तत्काल संज्ञान लेकर न्यायपूर्ण निर्णय लिया जाए।






