नेपाल में राजशाही और हिंदू राष्ट्र को लेकर बवाल, पुलिस और प्रदर्शन कारियों में झड़प,दागे गए अश्रु गैस के गोले
समूचे नेपाल में जन विद्रोह की आशंका
काठमांडू की सड़कों पर सेना
का परिचालन
मनोज कुमार त्रिपाठी
काठमांडू नेपाल ! नेपाल में राजशाही की बहाली और हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर विरोध तेज होता जा रहा है। ‘राजा लाओ देश बचाओ’ और ‘हाम्रो राजा हाम्रो देश’ के नारों के साथ आज लाखों लोग सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया है। इतना ही नहीं ‘ओली गद्दी छोड़, और ‘नारायणहिती दरबार खाली गर’ के नारे भी लगाए गए।

इसी कड़ी में आज काठमांडू में राजशाही समर्थकों की पुलिस के साथ झड़प हो गई। इस दौरान जमकर पत्थरबाजी और आगजनी की गई है। हालात पर काबू पाने की कोशिश की जा रही है। स्थित तनावपूर्ण है लेकिन प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।
नेपाल में राजशाही और हिन्दू राष्ट्र की मांग वाला आंदोलन दिनों दिन तेज ही होता जा रहा है। आज के आंदोलन का नेतृत्व जहां एक तरफ राष्ट्र, राष्ट्रीयता, धर्म, संस्कृति और नागरिक बचाओ महाअभियान नेपाल के राष्ट्रीय अध्यक्ष दुर्गा प्रसाई ने किया वहीं दूसरी तरफ गणतंत्र बचाने के बचाओ अभियान का नेतृत्व माओवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहाल उर्फ प्रचंड ने किया। राजशाही का समर्थन करने वाले 07 संगठनों ने सरकार को एक हफ्ते का अल्टिमेटम दे दिया है। उनका कहना है कि अगर हफ्तेभर के अंदर कोई समझौता नहीं किया गया तो वे आंदोलन को और तेज कर देंगे।

संगठन के प्रवक्ता नवराज सुवेदी ने कहा कि उन्होंने सभी लोकतांत्रिक पार्टियों और सरकार को एक सप्ताह का समय दिया है। उन्होंने कहा कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा है। हालांकि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो यह आंदोलन और तेज होगा और हम अपना लक्ष्य हासिल करके ही रहेंगे। उनका कहना है कि सरकार को 1991 वाला संविधान लागू करना चाहिए और देश में संवैधानिक राजशाही होनी चाहिए जिसमें मल्टी पार्टी सिस्टम और संसदीय लोकतंत्र को भी जगह दी गई है। उनका कहना है कि नेपाल को हिंदू राष्ट्र होना चाहिए।

उनकी सरकार से मांग है कि मौजूदा संविधान में जरूरी संशोधन करके पूराने कानूनों को लागू करना चाहिए।
वहीं माओवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहाल उर्फ प्रचंड के नेतृत्व में शुक्रवार को चार पार्टियों का गठबंधन सोशलिस्ट रिफॉर्म भी लोकतंत्र के समर्थन में प्रदर्शन किया है। इसमें कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल माओइस्ट और सीपीएन भी शामिल था। उनका कहना है कि नेपाल के लोगों ने इस लोकतंत्र के लिए संघर्ष किया है और इसे खत्म नहीं होने दिया जा सकता है।

सरकार ने कहा है कि राजधानी में तनाव को देखते हुए 5 हजार जवानों को तैनात किया गया है।
सुरक्षा एजेंसियों ने पहले ही काठमांडू में हिंसक झड़पों की आशंका जताई थी। पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र शाह के समर्थकों ने 11 अप्रैल से आंदोलन को तेज करने का ऐलान किया है। वहीं नेपाल के शीर्ष नेताओं का कहना है कि अब नेपाल में राजशाही की वापसी नामुमकिन है।




240 सालों तक हिंदू राष्ट्र रहा नेपाल
240 साल तक नेपाल हिंदू राष्ट्र था और यहां राजशाही चलती थी। 1 जून 2001 में राजा वीरेंद्र विक्रम शाह की परिवार समेत हत्या कर दी गई थी। इसके बाद 2002 में उनके भाई ज्ञानेंद्र शाह राजा बन गए थे। वहीं चीन समर्थक कम्युनिस्ट पार्टी ने 2006 में राजशाही को खत्म कर दिया और नेपाल में कम्युनिस्टों का शासन हो गया। पुष्प कमल दहाल प्रचंड ने राजतंत्र के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध तक चला दिया था। जिसमें करीब 20 हजार लोगों ने जान गंवाई थी।