पहले विरोध, अब समर्थन — चुनावी रण में बदली रणनीति
द इंडिया एक्सप्रेस ब्यूरो
चुनावी सरगर्मियों के बीच बड़ा राजनीतिक उलटफेर सामने आया है। नागरिक उन्मुक्ति पार्टी से जुड़े बिरेंद्र कुमार धवल उर्फ भोटे ने ऐन मौके पर सियासी पलटी मारते हुए नया दांव चल दिया है।
जानकारी के मुताबिक, पहले राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी का मुखर विरोध करने वाले धवल अब उसी पार्टी के प्रत्याशी तौफीक अहमद के समर्थन में सक्रिय हो गए हैं। इस अप्रत्याशित बदलाव ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है और चुनावी समीकरणों को नई दिशा दे दी है।
विरोध से समर्थन तक के इस सफर को विपक्ष “सिद्धांतों से समझौता” करार दे रहा है, जबकि समर्थक इसे “समय की मांग और रणनीतिक फैसला” बता रहे हैं। स्थानीय स्तर पर इस फैसले का सीधा असर कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के मनोविज्ञान पर पड़ता दिख रहा है।
चुनाव से ठीक पहले हुई इस पलटीबाजी ने सवाल खड़े कर दिए हैं — क्या यह रणनीति है या अवसरवाद? क्या यह फैसला जनमत को प्रभावित करेगा या उल्टा असर डालेगा?
फिलहाल इतना तय है कि ऐन चुनावी घड़ी में हुए इस यू-टर्न ने मुकाबले को और भी रोमांचक और अनिश्चित बना दिया है।