विकलांग मजदूर से मारपीट और झूठे आरोपों का मामला
दिल्ली पुलिस के सिपाही की पत्नी पर गंभीर आरोप
डायल 112 चालक द्वारा पीड़ित को थप्पड़ मारने का आरोप
द इंडिया एक्सप्रेस न्यूज ब्यूरो
गोरखपुर! गोरखपुर, विकास नगर नकहा नंबर 2 क्षेत्र से एक गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। यहां एक विकलांग मजदूर रामबरन के साथ कथित रूप से झूठे और गंभीर आरोप लगाकर उसे फंसाने का प्रयास किया गया। यह पूरा मामला अब पुलिस की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रहा है।

पीड़ित रामबरन के अनुसार, वह रोज़ की तरह काम करने के बाद थककर करीब पाँच मिनट के लिए आराम कर रहा था। इसी दौरान सामने वाले मकान में रहने वाली महिला, जिसका पति दिल्ली पुलिस में तैनात है, ने रामबरन पर छेड़छाड़ और अनुचित हरकतों के आरोप लगाते हुए डायल 112 पर कॉल कर दी। रामबरन का कहना है कि ये आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं और इनके समर्थन में कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं है।
आरोप है कि पुलिस के पहुंचने से पहले ही महिला ने रामबरन को चप्पल से मारने की धमकी दी। पुलिस के मौके पर पहुंचते ही महिला यह आरोप लगाने लगी कि रामबरन उसे गंदी नज़रों से देख रहा था और इशारे कर रहा था, जबकि रामबरन के अनुसार उसने ऐसा कुछ भी नहीं किया और वह वहीं बैठकर आराम कर रहा था।
आरोप यह भी है कि मौके पर पहुंचे डायल 112 वाहन के चालक ने बिना किसी ठोस सबूत और आरोप सिद्ध हुए ही रामबरन को थप्पड़ मार दिया, केवल इस आधार पर कि वह कुछ सवालों का सही जवाब नहीं दे पाया।
रामबरन का यह भी कहना है कि उसने पुलिस को अपना नाम सही-सही बताया और गांव-आसपास के लोगों के नाम भी बताए, लेकिन जब उससे गांव के प्रधान का नाम पूछा गया और कुछ अन्य सवालों के जवाब सही नहीं दिए गए, तो उसे दोषी साबित करने की कोशिश की गई।

इसके बाद रामबरन को जबरन चौकी ले जाया गया, और मानसिक प्रताड़ना किए जाने का भी आरोप है। पीड़ित का कहना है कि बिना किसी निष्पक्ष जांच और ठोस प्रमाण के ही उसे दोषी मान लिया गया और वापस काम पर जाने से मना कर दिया गया।
मकान मालिक ने भी पीड़ित के पक्ष में बयान दिया कि रामबरन हमारा पुराना मजदूर है और कई वर्षों से हमारे यहां काम करता रहा है। वह जिम्मेदार, विवाहित और बच्चों वाला व्यक्ति है। उनसे इस प्रकार की हरकत की उम्मीद करना उचित नहीं है। मकान मालिक ने बताया कि उनके घर के पीछे महिलाएं रहती हैं और छत पर भी आती-जाती रहती हैं, लेकिन रामबरन से कभी कोई शिकायत नहीं मिली।
मकान मालिक कई बार घर छोड़कर काम के सिलसिले में बाहर रहते हैं और उस दौरान रामबरन अकेले काम करता रहा। जब यह घटना हुई, मकान मालिक तीन दिनों से घर पर मौजूद थे, फिर भी महिला ने कोई जानकारी नहीं दी। मकान मालिक ने बताया कि महिला अक्सर यह बताती रहती है कि उसका पति दिल्ली पुलिस में है।
मकान मालिक का कहना है कि यदि समय रहते उन्हें जानकारी दी जाती, तो वे स्वयं उचित कार्रवाई करते।

यह मामला इसलिए और भी गंभीर हो जाता है क्योंकि पीड़ित विकलांग, गरीब और असहाय मजदूर है।
पीड़ित की मांग है कि दिल्ली पुलिस के सिपाही की पत्नी द्वारा लगाए गए कथित झूठे आरोपों, मौके पर हुई मारपीट तथा चौकी में कथित पुलिस अत्याचार की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए।
रामबरन ने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाते हुए कहा है कि यदि आरोप सिद्ध नहीं होते हैं, तो झूठा आरोप लगाने वालों और जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।







