उन्होंने मायादेवी मंदिर का किया दौरा और विश्व शांति तथा भारत-नेपाल मैत्री के लिए प्रार्थना की
उमेश चन्द्र त्रिपाठी
लुंबिनी नेपाल! भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई ने नेपाल पहुंचकर भारतीय सीमा से सटे बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी का दौरा किया है।
न्यायपालिका का सर्वोच्च पद संभालने के बाद यह उनकी पहली नेपाल यात्रा है। उन्होंने कहा कि वह लुंबिनी आगमन को एक विशेष आध्यात्मिक अवसर मानते हैं। शनिवार सुबह लुंबिनी पहुंचने पर उनका लुंबिनी विकास ट्रस्ट के उपाध्यक्ष डॉ. ल्हारक्याल लामा (खेंपो छिमे त्सिरिंग), सदस्य-सचिव सानुराजा शाक्य, कार्यकारी सदस्य श्याम रोक्का, वरिष्ठ प्रशासन प्रमुख ज्ञानिन राय और ट्रस्ट के अन्य अधिकारियों ने स्वागत किया।
यात्रा के दौरान, उन्होंने लुंबिनी क्षेत्र के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने मायादेवी मंदिर परिसर का दौरा किया और बुद्ध की जन्मस्थली का अवलोकन किया तथा सूत्र का पाठ किया। उन्होंने विश्व शांति, मानव कल्याण, नेपाल की प्रगति और भारत-नेपाल के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों की मजबूती की कामना करते हुए दीप प्रज्वलित की।
लुंबिनी की अपनी यात्रा के वह लुंबिनी विकास निधि के अधिकारियों के साथ मास्टर प्लान और वर्तमान में चल रही विकास गतिविधियों में अपनी रुचि व्यक्त की। उन्होंने लुंबिनी को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर और आगे बढ़ाने के नेपाल के प्रयासों की सराहना की और विश्वास व्यक्त किया कि इस क्षेत्र में भारत का सहयोग जारी रहेगा। डॉ. लामा ने मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गवई को बुद्ध की एक प्रतिमा भेंट की। लुंबिनी विकास निधि ने विश्वास व्यक्त किया है कि मुख्य न्यायाधीश गवई की यह यात्रा लुंबिनी के माध्यम से नेपाल के पर्यटन, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व को और मजबूती प्रदान करेगा।





