सीएम योगी ने की पंचायतीराज विभाग के कार्यों की समीक्षा 

उमेश चन्द्र त्रिपाठी 

लखनऊ! उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्य नाथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को पंचायतीराज विभाग के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि गांवों में तालाबों को तीन से पांच वर्षों तक के लिए पट्टे पर दिया जाए। वहीं इससे प्राप्त होने वाले राजस्व का उपयोग ग्राम विकास में किया जाए। तालाब आवंटन, रखरखाव व उसके उपयोग के लिए पंचायतीराज, राजस्व व मत्स्य विभाग एक समन्वित कार्ययोजना शीघ्र तैयार करे।

योगी ने कहा कि तालाब केवल जल स्रोत नहीं हैं। यह ग्राम्य संस्कृति के वाहक भी हैं। ऐसे में इन्हें समय रहते सूचीबद्ध किया जाए। वहीं वर्षा जल संचयन के लिए ग्राम सचिवालय, आंगनबाड़ी केंद्रों व प्राथमिक विद्यालयों में अनिवार्य रूप से सिस्टम लगाया जाए। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों के कार्यों में पारदर्शिता बढ़ाई जाए। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ग्राम सहायकों को अनिवार्य रूप से 15 दिनों की कंप्यूटर ट्रेनिंग दी जाए। प्रदेश के ग्राम सचिवालयों को नीति आयोग ने एक मॉडल माना है। प्रदेश में 57695 ग्राम पंचायतों में ग्राम सचिवालय स्थापित किए गए हैं।

उन्होंने निर्देश दिया कि इन सचिवालयों में स्थापित कंप्यूटरों के माध्यम से पंचायत गेट-वे पोर्टल से जुड़ी समस्त धनराशियों का भुगतान किया जाए। योगी ने पंचायतीराज विभाग के राज्य स्तरीय कॉल सेंटर, ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली, 10 सीटर कॉल सेंटर की स्थापना, ग्राम सचिवालयों की जियोफेंसिंग और इंटरनेट कॉलिंग जैसी डिजिटल पहलों की सराहना की।

उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों और जिला पंचायतों के कार्यों की निगरानी इन डिजिटल प्लेटफॉर्म से की जाए। अमृत सरोवरों के रखरखाव, पौधरोपण व सार्वजनिक कार्यक्रमों में ग्राम पंचायतों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए।

ड्रेनेज का पानी किसी भी कीमत पर अमृत सरोवर या अन्य तालाबों में न पहुंचे। योगी ने कहा कि ग्रामीण स्वच्छता को प्राथमिकता दी जाए और सफाई कर्मियों को समय पर मानदेय दिया जाए। अब तक 96171 राजस्व ग्रामों में से 90891 राजस्व ग्रामों को ओडीएफ प्लस घोषित किया जा चुका है। योगी ने ग्रामीण क्षेत्रों में सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग को पूर्णतया प्रतिबंधित करने और प्लास्टिक प्रबंधन इकाइयों के समयबद्ध ढंग से निर्माण के निर्देश दिए।

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि 150 में से 89 प्रस्तावित इकाइयों का कार्य पूर्ण हो चुका है। वहीं 73 जिलों में 115 गोबरधन प्लांट भी बनकर तैयार हो चुके हैं।योगी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में ईज ऑफ लिविंग को बढ़ावा देने के लिए स्मार्ट विलेज की अवधारणा को प्राथमिकता दी जाए। ग्राम सचिवालय, कॉमन सर्विस सेंटर, सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानें, उत्सव भवन, पब्लिक एड्रेस सिस्टम, सीसीटीवी कैमरे व स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था की जाए।

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