मनोज कुमार त्रिपाठी
महेशपुर नेपाल! गठबंधन की राजनीति नेपाल की संघीय व्यवस्था की एक अपरिहार्य वास्तविकता बन गई है। उक्त बातें नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व गृह राज्यमंत्री देवेन्द्र राज कंडेल ने द इंडिया एक्सप्रेस न्यूज के डायरेक्टर मनोज कुमार त्रिपाठी से एक्सक्लूसिव बातचीत के दौरान कही।

उन्होंने कहा कि संस्कृति, जातीयता, भाषा, धर्म के मामले में अत्यधिक विविधता और जाति, वर्ग, जातीयता और लिंग के आधार पर भारी असमानताओं के कारण, नेपाल को सभी का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए आनुपातिक प्रतिनिधित्व वाली संघीय व्यवस्था की आवश्यकता थी। हालांकि, नेपाल में गठबंधन की राजनीति राजनीतिक अस्तित्व और राजनीतिक अनिश्चितताओं का एक नाजुक खेल बन गई है, जहां अप्रत्याशित घटनाओं और निर्णयों का देश की नीति नियोजन और कार्यान्वयन पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। नेपाल में, गठबंधन की राजनीति में कई तरह की पार्टियां शामिल हो गई हैं, लेकिन अंतर्निहित उद्देश्य सत्ता को बनाए रखना है।
इसके अतिरिक्त, नेपाल नवंबर 2026 तक सबसे कम विकसित देशों (एलडीसी) की श्रेणी से बाहर निकलने की राह पर है, और अगला आम चुनाव 2027 में होने वाला है। नेपाल में मौजूदा राजनीतिक अनिश्चितताएं एलडीसी स्नातक स्तर की पढ़ाई के लिए देश की तैयारियों पर असर डाल सकती हैं। साथ ही, ये राजनीतिक झटके और अनिश्चितताएं आम लोगों में राजनीतिक चेतना भी पैदा कर रही हैं, जिसका संभावित रूप से आगामी चुनावों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है। इससे नेपाल के राजनीतिक परिदृश्य में उल्लेखनीय बदलाव आ सकता है। उन्होंने कहा कि अभी कांग्रेस और एमाले की गठबंधन की सरकार चल रही है जिसके प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली जी हैं पर जिन सात विंदुओं को लेकर सरकार बनी थी अभी पूर्ण रूप से उस पर अमल नहीं हो पाया है। इसको लेकर दोनों दलों के भीतर व्यापक चर्चा चल रही है।
राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के कद्दावर नेता व सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री दीपक बोहरा के निधन के बाद रूपंदेही जिले की क्षेत्र नंबर तीन की उक्त सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि पिछले चुनाव में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बालकृष्ण खांड़ को दीपक बोहरा ने हराकर बाजी मारी थी। उपचुनाव में पार्टी किसे अपना उम्मीदवार बनाएगी पार्टी के भीतर लगातार मंथन चल रहा है। जिन प्रत्याशियों के नाम सामने आ रहे हैं उनमें बालकृष्ण खांड़,भरत शाह, पूर्व सांसद प्रमोद यादव के अलावा अन्य लोगों के नामों पर भी पार्टी में मंथन चल रहा है। देश से युवाओं के बड़े पैमाने पर पलायन को देखते हुए युवा उम्मीदवार पर भी मंथन चल रहा है।
कुल मिलाकर, लगातार राजनीतिक झटके और नीतिगत अस्थिरता ने नेपाल की अपेक्षित आर्थिक वृद्धि और विकास को बाधित कर दिया है। प्रांतीय सरकारों में बार-बार होने वाले फेरबदल के कारण शासन व्यवस्था खराब हो गई है, नीतिगत अस्थिरता बनी हुई है और विकास परियोजनाओं की प्रगति धीमी हो गई है। लगातार हो रहे राजनीतिक झटकों ने नीति और आर्थिक स्थिरता पर नकारात्मक प्रभाव डाला है, जिससे देश की आर्थिक वृद्धि और समग्र विकासात्मक हितों में बाधा उत्पन्न हुई है। इस लिए जनता असंतुष्ट हो सकती है।

