नेपाल Gen-Z आंदोलन के दौरान सुंधारा कारागार नेपाल से भागकर अपने घर भारत आ गया था
मनोज कुमार त्रिपाठी
नेपाल में हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ Gen-Z के आंदोलन के दौरान नेपाल के कई जिलों से कैदी जेल तोड़कर फरार हो गए थे कईयों को उनके ठिकानों से पकड़ा गया, कुछ भारत नेपाल बॉर्डर पर पकड़े गए, लेकिन अभी भी तमाम कैदी फरार हैं जिनकी तलाश जारी है। लेकिन भारत के रहने वाले मुस्लिम युवक ने मिसाल पेश की है जो नेपाल काठमांडू के सुंधारा कारागार में अपनी सजा काट रहा था, आंदोलन के दौरान वह भी कारागार से भारत में स्थित अपने घर भाग आया था अब नेपाल की स्थिति सामान्य होने पर अपनी स्वेच्छा से जेल में वापस जा रहा है।

उसकी इस हिम्मत की लोग सराहना कर रहे हैं, क्योंकि नेपाल के कैदी अगर भारत या दूसरे देश में चले जाएं तो उनको उस देश में पकड़ना बडा ही कठिन होता है लेकिन जिस तरह महराजगंज के सोनौली कस्बे के रहने वाले उमर शेख ने 9 साल नेपाल जेल में सजा काटी और विवाद के समय वह अपने कारागार से भागकर घर आ गया था लेकिन अब, बचे हुए सजा को काटने के लिए अपनी स्वेच्छा से वह नेपाल काठमांडू के सुंधारा कारागार में जाने के लिए रवाना हो चुका है।

उमर शेख ने मीडिया को बताया कि नेपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग के दौरान सड़कों पर आंदोलन किया जाने लगा, जेल में फोर्स की कमी हो गई तमाम कैदी जेल तोड़कर भागने लगे। जेल में अफरा-तफरी का माहौल हो गया, उस समय कुछ समझ में नहीं आ रहा था की क्या किया जाए, क्योंकि अगर वहां रुके तो कहीं ऐसा न हो की जेल में भी कुछ कैदी दुश्मन होते हैं उनके शिकार हो जाए, इसलिए वह भी कारागार से भाग निकला और भारत नेपाल सीमा सोनौली के स्थानीय कस्बे में जहां उसका घर है वह चला आया, उसने यह भी बताया कि जब वह वहां से निकला था तो यह सोच रखा था कि जब नेपाल में स्थिति सामान्य हो जाएगी तो वह फिर से जेल में वापस लौट जाएगा, अब नेपाल की स्थिति सामान्य हो गई है नेपाल में अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की जो की पूर्व जस्टिस रही है। उमर का मानना है कि उनके कार्यकाल में उन्हें भी न्याय मिलेगा उनके ऊपर भगोड़ा का ठप्पा नहीं लगेगा, इसलिए वह अपनी स्वेच्छा से नेपाल काठमांडू में स्थित सुंधारा जेल में जाने के लिए निकल चुका है।


उमर शेख ने बताया कि वह नेपाल में प्लाईवुड का काम करते था। भारत से नेपाल लाने के लिए उसने सामान का भंसार भी कराया करता था लेकिन उसे यह कहकर पकड़ा गया कि उसके द्वारा फर्जी दस्तावेज के आधार पर भंसार कराया गया है, कुछ दिन केस चला और फिर उसे न्याय मिला कि उनका भंसार फर्जी नहीं है, वेल भी मिल गई, लेकिन अचानक कुछ लोगों के द्वारा षड्यंत्र रचकर उसे अपहरण के केस में फंसा दिया गया, जिस व्यक्ति के अपहरण की बात को लेकर उसे सजा सुनाई गई वह कभी उन लोगों से वाकिफ भी नहीं था और न ही वह लोग कोर्ट में हाजिर हुए, फिर भी कैसे क्या हुआ कुछ समझ में नहीं आया। वर्ष 2016 में उसे 9 साल की सजा सुनाई गई और वह तभी से सजा काट रहा है।

उसने बताया कि 26 सितंबर 2025 को उसकी सजा पूरी हो जाएगी, उसकी रिहाई को महज कुछ ही दिन बचे हुए हैं जिसे काटने के लिए वह फिर से उस जेल में वापस जा रहा है जहां उसने अब तक का सजा काटा।
उमर शेख ने जेल से भागे अन्य कैदियों से भी अपील किया है कि वह जल्द से जल्द अपने कारागार में वापस लौट आए, नेपाल में अब पूर्व जस्टिस सुशीला कार्की का अनुशासन है, उम्मीद है की सभी को इंसाफ मिलेगा। फिलहाल उमर शेख ने तो अपनी कैद वापसी कर ली है, आने वाली 26 सितंबर को उसका सजा पूरा होगा, उस दिन उसे मुक्त किया जाएगा या नहीं यह देखने वाली बात होगी।







