उमेश चन्द्र त्रिपाठी
काठमांडू! नव-नियुक्त ऊर्जा, जलस्रोत तथा सिंचाई, भौतिक पूर्वाधार तथा यातायात और शहरी विकास मंत्री कुलमान घिसिंग ने पदभार ग्रहण कर लिया है।
सोमवार दोपहर सिंहदरबार स्थित मंत्रालय पहुंचकर उन्होंने पदभार संभाला। मंत्री घिसिंग ने डेडिकेटेड और ट्रंकलाइन के बकाया रकम वसूलने के लिए नेपाल विद्युत प्राधिकरण को निर्देश देने का निर्णय भी लिया है।
पदभार ग्रहण करते ही उन्होंने यह निर्णय किया। इसके बाद उन्होंने संबंधित मंत्रालय के कर्मचारियों से बैठक की। जब वे प्राधिकरण के कार्यकारी निदेशक थे, तब भी उन्होंने बकाया वसूलने का प्रयास किया था।
लेकिन तत्कालीन सरकार ने इस पर रोक लगा दी थी। पिछले एक दशक से लगातार चर्चा में रहने वाले कुलमान घिसिङ अब ऊर्जा मंत्री की जिम्मेदारी लेकर आए हैं। करीब आठ वर्ष पहले जब घिसिङ ने पहली बार विद्युत प्राधिकरण का नेतृत्व संभाला था, तब नेपाल को ‘लोडशेडिंग मुक्त’ घोषित किया गया था।
सन् 2016 (वि.सं. 2073) के तिहार से शहरों में लोडशेडिंग खत्म करने की घोषणा हुई थी और 2018 (वि.सं. 2075) वैशाख में पूरे देश को लगभग डेढ़ दशक से जारी बिजली आपूर्ति की समस्या से मुक्त कर दिया गया था। घिसिंग ने ही देश की कठिन परिस्थितियों के बीच ऊर्जा मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली है।
सन् 2021 (वि.सं. 2078) सावन में पुष्प कमल दहाल के प्रधानमंत्री होने के समय घिसिंग दूसरी बार प्राधिकरण प्रमुख बने। लेकिन तत्कालीन ओली सरकार और उनके बीच टकराव हुआ। ऊर्जा, जलस्रोत एवं सिंचाई मंत्री दीपक खड़का और उनके बीच कभी तालमेल नहीं बैठा।
विशेष रूप से उद्योगों में डेडिकेटेड और ट्रंक लाइन का शुल्क न चुकाने के कारण प्राधिकरण ने वहां की बिजली काटने का फैसला किया, जबकि मंत्री-प्रधानमंत्री ने ऐसा न करने पर जोर दिया। इसी विवाद ने तूल पकड़ा।
बिजली शुल्क के मुद्दे पर विवाद गहराने के बाद उद्योगपतियों की लाइन काटने की घिसिंग की कार्यवाही से तत्कालीन केपी ओली नेतृत्व वाली सरकार असंतुष्ट हो गई और उसी सरकार ने उन्हें 6 महीने पहले पद से हटा दिया था।




