सड़क मार्ग से 25,000 रुपये और हवाई मार्ग से 4.25 लाख रुपये ले जाने की अनुमति
व्यापारी संगठनों ने नकदी सीमा समान करने की अपील की
उमेश चन्द्र त्रिपाठी
काठमांडू भैरहवा नेपाल! भारत और नेपाल की सिर्फ सीमा ही नहीं जुड़ती, दोनों देशों की संस्कृति और खानपान भी काफी हद तक एक-दूसरे के समान हैं। भारत से हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक नेपाल घूमने जाते हैं। भारतीयों के लिए नेपाल आना-जाना न सिर्फ सस्ता रहता है, बल्कि रेगुलेशन नियमों के तहत भी काफी आसान है। भारतीयों के लिए न तो वीजा की जरूरत होती है और न ही पासपोर्ट की। हां, नेपाल जाने के लिए पैसे ले जाने की लिमिट जरूर लगा रखी है। भारतीय पर्यटक कितना पैसा लेकर नेपाल जा सकते हैं, इस बारे में काफी कम लोग ही जानते होंगे। अब नेपाल के व्यापारिक संगठनों ने इस लिमिट को और बढ़ाने की मांग रखी है।

नेपाल के एक प्रमुख व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ कॉमर्स ने सरकार से आग्रह किया कि वह देश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भारतीयों के करेंसी ले जाने की लिमिट को बढ़ाए। खासकर सड़क मार्ग से देश में प्रवेश करने वाले भारतीय पर्यटकों के लिए यह लिमिट काफी कम है, जबकि फ्लाइट से नेपाल जाने वालों को इस मामले में ज्यादा छूट दी जाती है। इसका मतलब है कि अगर कार या बस से नेपाल सीमा में प्रवेश करते हैं तो भारतीय पर्यटक कम पैसे ले जा सकते हैं, जबकि हवाई मार्ग से जाने वालों को इससे कई गुना ज्यादा पैसे साथ ले जाने की छूट रहती है।

कितना पैसा ले जा सकते हैं भारतीय
नेपाल में अभी सड़क मार्ग के जरिये आने वाले भारतीय पर्यटकों को सिर्फ 25 हजार भारतीय रुपये (करीब 40 हजार नेपाली रुपये) साथ ले जाने की अनुमति रहती है। वहीं, हवाई मार्ग से नेपाल में प्रवेश करने वाले पर्यटकों को अपने साथ 5 हजार डॉलर यानी 4.25 लाख भारतीय रुपये साथ ले जाने की छूट मिलती है। नेपाली करेंसी में यह करीब 6.8 लाख रुपये होगा। अब नेपाल के व्यापारी संगठनों ने सड़क और हवाई मार्ग से आने वाले पर्यटकों के करेंसी ले जाने की एकसमान लिमिट करने की अपील की है।
क्या मांग कर रहे व्यापारी
फेडरेशन ऑफ नेपाली चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एफएनसीसीआई) के अध्यक्ष चंद्र प्रसाद ढकाल ने कहा कि यदि नेपाल भारतीय पर्यटन को बढ़ावा देना चाहता है, तो सड़क मार्ग से नेपाल में प्रवेश करने वाले भारतीय पर्यटकों को केवल 25,000 रुपये तक का नकद धन ले जाने की अनुमति देने का वर्तमान प्रावधान पर्याप्त नहीं है। एफएनसीसीआई के पदाधिकारियों और वित्तमंत्री बिष्णु पौडेल के बीच बजट पूर्व बातचीत के दौरान कहा, जब नेपाल जाने के लिए हवाई जहाज का उपयोग करने वालों के लिए 5,000 डॉलर ले जाने का प्रावधान है, तो यही प्रावधान सड़क मार्ग के रास्ते नेपाल में प्रवेश करने वाले भारतीय पर्यटकों पर क्यों नहीं लागू होना चाहिए?

हर साल कितने लोग जाते हैं नेपाल
नेपाल की जीडीपी में पर्यटन की हिस्सेदारी करीब 19 फीसदी है और इसमें भी सबसे ज्यादा पर्यटक भारत से जाते हैं। मार्च, 2025 में 1,21,687 पर्यटक नेपाल पहुंचे, जिसमें से 35 फीसदी संख्या सिर्फ भारतीय पर्यटकों की रही है। इससे पहले फरवरी महीने में करीब 96 हजार पर्यटक दुनियाभर से नेपाल पहुंचे थे। इस साल मार्च में 21,412 भारतीय पर्यटक नेपाल पहुंचे, जबकि पिछले साल मार्च महीने में 30,700 भारतीय पर्यटक नेपाल घूमने पहुंचे थे। इसी औसत से देखा जाए तो हर साल नेपाल में 3 लाख से ज्यादा भारतीय पर्यटक आते हैं।
रूपंदेही जिले के सिद्धार्थ नगर पालिका भैरहवा के मेयर इश्तियाक अहमद खान ने कहा कि भारतीय पर्यटकों को नेपाल आने के लिए कम से कम 5 लाख रुपए की छूट मिलनी चाहिए।

होटल व्यवसाई संघ के केंद्रीय उपाध्यक्ष चंद्र प्रकाश श्रेष्ठ ने कहा कि जब भारतीय पर्यटकों को नेपाल में पैसा लाने की छूट नहीं मिलेगी तब तक होटल व्यवसाय को कोई फायदा नहीं होगा।
भैरहवा उद्योग वाणिज्य संघ के अध्यक्ष ठाकुर कुमार श्रेष्ठ ने कहा की गलत नीतियों के कारण ही नेपाल का पर्यटन व्यवसाय चौपट होता जा रहा है।
सिद्धार्थ संज्जाल एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल कुमार ज्ञवाली ने कहा कि नेपाल के पर्यटन उद्योग को अगर बचाना है तो भारतीय पर्यटकों के नेपाल आने पर उनकी सुरक्षा देने कि जिम्मेदारी और पैसा लाने में भारी छूट देनी पड़ेगी।

