मनोज कुमार त्रिपाठी
क्षेत्र संख्या पाँच संसदीय क्षेत्र से नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एमाले) के प्रत्याशी ने चुनावी मैदान में उतरते ही विकास, जनसेवा और व्यापक परिवर्तन को अपना मुख्य एजेंडा घोषित किया है। उनका कहना है कि यह चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के रूपांतरण का चुनाव है।
प्रत्याशी ने सीमावर्ती क्षेत्र ककरहवा की समस्याओं को प्राथमिकता देते हुए कहा कि ककरहवा भंसार नाका में लंबे समय से व्यवस्थागत कठिनाइयाँ बनी हुई हैं। छोटी भंसार और पीली प्लेट वाहनों के संचालन में आ रही बाधाओं से स्थानीय व्यापारियों और आम नागरिकों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि ककरवा भंसार नाका को एक आधुनिक और सुव्यवस्थित पर्यटक भंसार नाका के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे व्यापार और आवागमन दोनों को गति मिलेगी।
युवाओं के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि शिक्षा, कौशल (स्किल) और रोजगार उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। “जब युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और हुनर मिलेगा, तभी वे आत्मनिर्भर बन सकेंगे,” उन्होंने कहा। साथ ही कृषि के आधुनिकीकरण और क्षेत्र को पर्यटन हब के रूप में विकसित करने की योजना भी उनके एजेंडे में शामिल है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
भारत-नेपाल संबंधों पर उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते मित्रता, सहयोग और आपसी सम्मान पर आधारित होने चाहिए। उनका मानना है कि मजबूत द्विपक्षीय संबंध सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
चुनावी माहौल में यह विकास-केंद्रित एजेंडा क्षेत्र में नई चर्चा को जन्म दे रहा है। अब देखना यह होगा कि जनता इस विज़न को कितना समर्थन देती है।