त्रिवेणी धाम में दिव्य आस्था का उद्गार: गंगा-नारायणी संगम पर गूंजे जयकार, गजेंद्र मोक्ष धाम की पौराणिक गाथा ने किया विह्वल

मनोज कुमार त्रिपाठी

त्रिवेणी धाम , नेपाल ! नेपाल के पवित्र त्रिवेणी धाम में आज शाम अद्भुत और आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला, जहाँ राष्ट्रदेव पशुपतिनाथ और त्रिवेणी धाम के जयकारों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान रहा। तीन पवित्र नदियों—सोनाभद्र, पूर्णाभद्रा और नारायणी—के पावन संगम पर स्थित यह धाम धार्मिक आस्था, इतिहास और पौराणिक विरासत का अनुपम केंद्र माना जाता है।

 

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संगम तट पर स्थित जटेश्वर शिवालय मंदिर में भक्तों की बड़ी संख्या में पहुंचकर भोलेनाथ के दर्शन किए। क्षेत्र के विद्वानों ने बताया कि प्राचीन काल में इस पर्वतीय क्षेत्र को त्रिकूटाचल और ब्रह्माद्विप यज्ञ भूमि के नाम से जाना जाता था।

त्रिवेणी धाम से उत्तर दिशा में लगभग एक किलोमीटर आगे स्थित गजेंद्र मोक्ष दिव्य धाम भी श्रद्धालुओं का प्रमुख केंद्र है। मान्यता है कि गज-ग्राह युद्ध के दौरान जब मगर (ग्राह) ने हाथी (गज) पर आक्रमण किया, तब हाथी ने विष्णु भगवान का आर्तनाद करते हुए स्मरण किया। भगवान विष्णु गरुड़ पर सवार होकर तत्काल प्रकट हुए और दोनों जीवों का उद्धार कर इस भूमि को मोक्षस्थली बना दिया।

 

मुक्तिनाथ से लेकर दामोदर कुंड तक बहते सालिग्राम त्रिवेणी धाम में विराजमान होते हैं, जिसके चलते इस क्षेत्र को सालिग्राम क्षेत्र भी कहा जाता है। इसी तट पर स्थित गंगा मैया को मनोकामनाएँ पूर्ण करने वाली देवी माना जाता है। वहीं नदी पार स्थित सीतामढ़ी मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का एक महत्त्वपूर्ण केंद्र है।

नारायणी तट पर ढलते सूर्य के साथ भक्ति-गीतों और जयघोषों से वातावरण अलौकिक हो उठा।

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