भैरहवा भंसार की बदहाल व्यवस्था पर डॉ. शांत कुमार शर्मा का बड़ा बयान, एक ड्राइवर की मौत के बाद उठे कई सवाल

मनोज कुमार त्रिपाठी 

भैरहवा, नेपाल! उद्योग वाणिज्य महासंघ रूपंदेही के पूर्व अध्यक्ष डॉ. शांत कुमार शर्मा ने भैरहवा भंसार (कस्टम कार्यालय) की बदहाली पर गहरी नाराजगी जताई है। हाल ही में गर्मी और जाम के बीच एक ट्रक ड्राइवर की मौत के बाद हालात को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा, “यह केवल एक कस्टम कार्यालय नहीं, बल्कि नेपाल की अर्थव्यवस्था में वीरगंज के बाद दूसरा सबसे बड़ा आर्थिक योगदान देने वाला भंसार है, फिर भी यहां बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है।

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डॉ. शर्मा ने बताया कि भैरहवा भंसार पर न तो ड्राइवरों के बैठने के लिए शेड है, न ही रहने की सुविधा, न साफ पानी और न ही लाइट की व्यवस्था। शौचालय की व्यवस्था तो बद से बद्तर है। भीषण गर्मी में लोग झुलस रहे हैं, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं दिखता। उन्होंने कहा कि सरकार को राजस्व से मिलने वाले लाभ के अनुपात में सुविधाएं भी देनी चाहिए।

ड्राइवर की मौत और सर्वर फेल की गंभीर समस्या

उन्होंने खुलासा किया कि एक ड्राइवर की मौत का कारण भंसार का सर्वर फेल होना भी रहा। “यह सिर्फ भैरहवा की नहीं, देशव्यापी समस्या है। 10-15 साल पुराना सर्वर सिस्टम अभी तक चल रहा है जो अब अप्रासंगिक हो चुका है,” डॉ. शर्मा ने बताया।

टोकन सिस्टम और आईसीपी निर्माण का हवाला

डॉ. शर्मा ने सुझाव दिया कि भीड़ से निजात पाने के लिए टोकन सिस्टम लागू किया जाए ताकि ट्रक ड्राइवरों को लंबी लाइन में न लगना पड़े। उन्होंने बताया कि प्रमुख भंसार अधिकारी ने आईसीपी (इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट) निर्माण का हवाला दिया है, लेकिन उसका पूरा होना अभी समय लेगा, और तब तक जनता कैसे झेले?

पर्यटकों की दुर्दशा पर चिंता

डॉ. शर्मा ने पर्यटकों की हालत पर भी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि रोजाना हजारों की संख्या में भारतीय पर्यटक कारों और विभिन्न साधनों को से नेपाल पहुंचते हैं, लेकिन स्वागत के नाम पर कोई बुनियादी सुविधा तक नहीं है। “यदि पर्यटकों को सुविधाएं नहीं मिलेंगी, तो वे क्यों आएंगे?”

भंसार टर्मिनल की जिम्मेदारी और सरकार की उदासीनता

उन्होंने अन्नपूर्णा टर्मिनल को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि एमओयू में जो सुविधाएं देने की बात हुई थी, वह पूरी नहीं की जा रही हैं। सरकार से उन्होंने मांग की कि सर्वर सिस्टम को जल्द अपडेट किया जाए और बुनियादी सुविधाओं में निवेश किया जाए। उन्होंने दो टूक कहा “दो-चार करोड़ रुपए खर्च कर सरकार बहुत कुछ सुधार सकती है ।

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