एक सप्ताह के भीतर यदि संचालन नहीं शुरू हुआ तो अनिश्चितकालीन हड़ताल, भारत-नेपाल सीमा को जाम करने की चेतावनी
एयरपोर्ट देखकर बनाए गए होटल ‘भूत बंगला’ बनते जा रहे हैं, अरबों का निवेश डूबने का खतरा
मनोज कुमार त्रिपाठी
भैरहवा नेपाल! इलेक्ट्रिक व्यवसाय से जुड़े फ्रोजन के राम थापा ने गौतमबुद्ध अंतर्राष्ट्रीय विमानस्थल बनने के बाद पर्यटन व्यवसाय में अवसर देखा। उन्हें लगा कि हवाई अड्डा बनते ही पर्यटकों की भीड़ उमड़ेगी और इसी सोच के साथ उन्होंने बैंक से कर्ज लेकर ‘स्वीट पूर्णिमा प्रा.लि.’ नामक होटल बनाना शुरू किया। एयरपोर्ट तो बन गया, लेकिन उम्मीद के मुताबिक पर्यटक नहीं आए।

थापा कहते हैं – “अब अधूरा होटल और अधूरे सपनों के साथ बैठा हूं।” सिद्धार्थनगर नगरपालिका वार्ड नं. 4 स्थित लुंबिनी रोड में थापा ने करीब 8 करोड़ रुपये लगाकर 8 मंजिला भवन का निर्माण शुरू किया, जिसमें अभी तक केवल तीन मंजिलों का ढांचा तैयार हुआ है। निर्माण कार्य रुक गया है और अब वह होटल एक भूत बंगले जैसा दिखने लगा है। अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा संचालन में नहीं आ पाने के कारण उनका निवेश डूबने की कगार पर है।

भैरहवा के प्रतिष्ठित व्यवसायी राज कुमार पोखरेल ने भी लुंबिनी के नजदीक पर्यटन व्यवसाय को बढ़ते अवसर के रूप में देखा और सिद्धार्थनगर नगरपालिका वार्ड नं. 8 में ‘बुद्ध स्टार होटल’ का निर्माण शुरू किया। अब तक इस होटल में 1 अरब रुपये से अधिक का निवेश हो चुका है। लेकिन अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें नियमित न होने के कारण बैंक आगे निवेश देने से हिचक रहे हैं और यह होटल भी अधूरा ही रह गया है।
पोखरेल कहते हैं – “सरकार को लुंबिनी क्षेत्र के समृद्ध विकास के लिए इस एयरपोर्ट को पूरी तरह से चालू करना ही होगा।
वास्तव में, एयरपोर्ट को देखकर भैरहवा, लुंबिनी, बुटवल और आसपास के क्षेत्रों में होटल व्यवसाय में करीब 1 खरब (100 अरब) रुपये से अधिक का निवेश हो चुका है। लेकिन एयरपोर्ट बने तीन साल बीत चुके हैं और अब तक नियमित अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें शुरू नहीं हुई हैं, जिससे सभी निवेश डूबने का खतरा है।
सिद्धार्थ होटल संघ नेपाल के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश श्रेष्ठ कहते हैं – “बैंक ब्याज माफ नहीं कर रहा, और होटल के कमरे खाली पड़े हैं। होटल कैसे चलाएं?” उनका कहना है कि सरकार ने 50 अरब से ज्यादा खर्च कर विमानस्थल का निर्माण किया, जिसे देखकर निजी क्षेत्र ने होटल व्यवसाय में भारी निवेश किया।

चालू होटल भी खाली पड़े हैं और कुछ होटल ‘भूत बंगले’ बनते जा रहे हैं। कुछ निवेशक होटल व्यवसाय से बाहर निकलने की सोच रहे हैं। श्रेष्ठ कहते हैं – “सरकार ने एयरपोर्ट को चालू करने की इच्छाशक्ति नहीं दिखाई, जिससे निवेशकों में निराशा फैली है।
नेपाल सरकार की 37.4% और एशियाई विकास बैंक की 62.6% हिस्सेदारी में निर्माण हुआ गौतमबुद्ध अंतर्राष्ट्रीय विमानस्थल 2079 बैशाख 2 (अप्रैल 2022) में संचालन में आया था। लेकिन करीब एक साल तक कोई अंतर्राष्ट्रीय उड़ान नहीं हो सकी। बाद में कुछ कंपनियों ने खाड़ी देशों में श्रमिकों को ले जाने के लिए उड़ानें शुरू कीं, लेकिन व्यापक रूप से संचालन संभव नहीं हो सका।
पिछले कार्तिक 3 से त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय विमानस्थल के मरम्मत के कारण कुछ एयरलाइनों (जैसे – जिरा एयरवेज, फ्लाई दुबई, थाई एयर एशिया और नेपाल एयरलाइंस) ने कुछ समय के लिए उड़ानें शुरू कीं, लेकिन फिर बंद हो गईं।
स्थानीय सरकारों और समुदायों ने एयरपोर्ट को संचालन में लाने के लिए सरकार पर दबाव बनाया है। लुंबिनी प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री चेत नारायण आचार्य ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री और नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के साथ इस विषय पर बातचीत की है। उन्होंने कहा – “इस क्षेत्र में अरबों रुपये का निवेश हो चुका है और सरकार को इस पर गंभीरता दिखानी चाहिए।
सिद्धार्थनगर नगर प्रमुख इश्तियाक अहमद खान का कहना है कि एयरपोर्ट उद्घाटन के तीन साल बाद भी उसका संचालन न हो पाना क्षेत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।
व्यवसायियों की तरफ से लगातार यह मांग उठ रही है कि विमान स्थल को पूरी तरह से चालू किया जाए। रूपंदेही उद्योग वाणिज्य संघ के अध्यक्ष दर्पण श्रेष्ठ का कहना है कि इस एयरपोर्ट को सक्रिय और नियमित संचालन के लिए आवश्यक नीति, पूर्वाधार और प्रबंधन जरूरी है।
उत्सव प्रसाद, सिद्धार्थ उद्योग वाणिज्य संघ के अध्यक्ष का कहना है कि सरकार की लापरवाही और इच्छाशक्ति की कमी के कारण एयरपोर्ट नियमित रूप से संचालन में नहीं आ पाया है। वे कहते हैं – “जब तक श्रमिकों के स्वास्थ्य परीक्षण, वीजा सेंटर, और अन्य आवश्यक भौतिक पूर्वाधार तैयार नहीं होते, तब तक एयरलाइंस यहां नहीं आएंगी।

सरकारी मंत्री हालांकि यह भरोसा दिला रहे हैं कि एयरपोर्ट को जल्दी ही चालू कर दिया जाएगा। उपप्रधानमंत्री और वित्तमंत्री विष्णु प्रसाद पौड़ेल ने कहा – “शुरुआत में लगा था कि यह एयरपोर्ट पूरा नहीं हो पाएगा, लेकिन अब यह पूर्ण क्षमता का अंतर्राष्ट्रीय विमानस्थल बन चुका है। अब इसे पूरी तरह से संचालन में लाने की दिशा में काम चल रहा है।”
2079 में एयरपोर्ट व्यावसायिक रूप से चालू हुआ था। लेकिन अब तक नियमित अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें नहीं हैं। प्रारंभिक अनुमान में इसकी लागत 30 अरब 91 करोड़ थी, लेकिन निर्माण अवधि बढ़ने और करों समेत लागत बढ़कर 35 अरब 66 करोड़ हो गई। इतना भारी खर्च करने के बावजूद आज भी एयरपोर्ट पूरी तरह चालू नहीं हो सका है।
त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय विमानस्थल की सीमाएं ध्यान में रखते हुए, गौतमबुद्ध अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट को एक विकल्प के रूप में देखा गया था। लेकिन यह कब पूरी तरह संचालन में आएगा, यह अब भी निश्चित नहीं है।

