मनोज कुमार त्रिपाठी
भैरहवा नेपाल! नेपाल मानवाधिकार संगठन की रूपन्देही जिला शाखा के तत्वावधान में शनिवार को भैरहवा में मानवाधिकार शिक्षा कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का उद्घाटन लुम्बिनी प्रदेश की प्रदेश सभा सदस्य हेमा बेलबासे (के.सी.) ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में देश में व्याप्त कुछ कुरीतियों और विकृतियों को राज्य की असफलता बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राज्य को नागरिकों का संरक्षक बनकर कार्य करना चाहिए। प्रदेश सांसद के.सी. ने कहा कि मानवाधिकार संरक्षण के लिए नियमित रूप से आवाज उठाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आम नागरिक अपने अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं हैं और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है। उन्होंने कहा, “सुशासन की शुरुआत अब करनी चाहिए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश त्रिपाठी ने कहा कि राज्य संचालन करने वालों में जिम्मेदारी और स्वामित्व का अभाव है। उन्होंने कहा कि संविधान ने रोजगार का अधिकार दिया है, फिर भी लाखों नेपाली रोजगार के लिए खाड़ी देशों में पलायन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि “संविधान केवल कागज पर नहीं, दिल में भी लिखा जाना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा, “संविधान लिखना कोई बड़ी बहादुरी नहीं है। उसमें कई अच्छी बातें लिखी गई हैं, लेकिन उनका सही ढंग से क्रियान्वयन नहीं होने से अधिकार धीरे-धीरे समाप्त हो जाते हैं।

उनका मानना था कि जनता को अपने संवैधानिक अधिकारों की जानकारी होनी चाहिए और इसके लिए मानवाधिकार शिक्षा जरूरी है।
सिद्धार्थनगर नगरपालिका-5 के उपाध्यक्ष पूर्ण प्रसाद श्रेष्ठ ने कहा कि सरकार का मूल कर्तव्य मानवाधिकारों की रक्षा करना है।
नेपाल मानवाधिकार शिक्षा समाज के स्रोत व्यक्ति प्रोफेसर डॉ. गोविंद ढकाल ने मानवाधिकार शिक्षा को बेहद महत्वपूर्ण बताया और सुशासन के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता बताई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता नेपाल मानवधिकार संगठन, रूपन्देही जिला शाखा के अध्यक्ष एवं कार्यक्रम समन्वयक पवन पौड़ेल ने की।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रदेश सभा सदस्य हेमा बेलबासे (के.सी.) थीं और संचालन संगठन के सचिव राजेश जी.सी. ने किया।
इस कार्यक्रम में नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस, नेपाली सेना, व्यापारी, छात्र, सामाजिक संस्थाओं के प्रमुख एवं प्रतिनिधियों की सक्रिय सहभागिता रही।

