महराजगंज जिले में प्राथमिक विद्यालय रूद्रपुर भलुही में बच्चों को रोते हुए प्रायोजित वीडियो चलाने के आरोप में प्रधानाध्यापिका निलंबित, शिक्षा विभाग मे हड़कंप

वीडियो शासन एवं प्रशासन की छवि धूमिल करने की सुनियोजित साजिश – जिलाधिकारी 

सार

जनपद के प्राथमिक विद्यालय रुद्रपुर भलुही से जुड़ा एक वीडियो सोमवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें बच्चियों को रोते हुए दिखाया गया और यह संदेश देने की कोशिश की गई कि विद्यालय बंद है और बच्चों को शिक्षा से वंचित किया जा रहा है।

मनोज कुमार त्रिपाठी 

महराजगंज! जनपद के प्राथमिक विद्यालय रुद्रपुर भलुही से जुड़ा एक वीडियो सोमवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें बच्चियों को रोते हुए दिखाया गया और यह संदेश देने की कोशिश की गई कि विद्यालय बंद है और बच्चों को शिक्षा से वंचित किया जा रहा है। लेकिन जैसे ही यह मामला जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा के संज्ञान में आया, उन्होंने तत्काल इसकी गहन जांच के आदेश देकर यह सिद्ध कर दिया कि प्रशासन की गरिमा और जनता के विश्वास से कोई भी खिलवाड़ नहीं कर सकता।

जानकारी के अनुसार बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) रिद्धि पांडेय द्वारा की गई जांच में यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि वीडियो पूरी तरह से प्रायोजित और साजिशपूर्ण था। जांच में विद्यालय की प्रधानाध्यापिका कुसुमलता पांडेय की संलिप्तता उजागर हुई, जिन्होंने बच्चों को बरगलाकर वीडियो तैयार किया और उसे वायरल कर प्रशासन को बदनाम करने की कोशिश की। इस कृत्य को अत्यंत गंभीर मानते हुए डीएम के निर्देश पर प्रधानाध्यापिका को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

वहीं विद्यालयों की निगरानी और पर्यवेक्षण कार्यों में लापरवाही बरतने के चलते परतावल ब्लॉक के खंड शिक्षा अधिकारी मुसाफिर सिंह पटेल को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है। जांच में यह भी सामने आया कि विद्यालय में छात्र नामांकन के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया था, जिसके चलते कुल नामांकन मात्र 32 ही था। साथ ही विद्यालय में अनिवार्य पंजिकाएं, जैसे कि कंपोजिट ग्रांट पंजिका, टीएलएम पंजिका, बाल मेला पंजिका, मध्याह्न भोजन पंजिका आदि उपलब्ध नहीं थीं।

डीएम संतोष कुमार शर्मा ने स्वयं वीडियो के संबंध में स्पष्टीकरण देते हुए बताया कि वायरल वीडियो पूरी तरह प्रायोजित था और विद्यालय को युग्मन नीति के तहत बंद नहीं किया गया है। विद्यालय में पूर्ववत पठन-पाठन कार्य चल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह वीडियो प्रशासन और शासन की छवि धूमिल करने की सुनियोजित साजिश थी, जिसे समय रहते विफल कर दिया गया।

बीएसए ने युग्मन नीति की जानकारी देते हुए कहा कि कम नामांकन वाले विद्यालयों को समीपवर्ती विद्यालयों से जोड़ा जा रहा है, ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षण माहौल, संसाधन और योग्य शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित की जा सके।

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