मां की ममता और त्याग को शब्दों में समेट पाना असंभव

मां एक ऐसा शब्द है जिसमें पूरा ब्रह्माण्ड समाहित है 

उमेश चन्द्र त्रिपाठी 

साल 11 मई को यानि आज पूरी दुनिया में मातृ दिवस(मदर्स डे) 2025′ बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास पूर्वक मनाया जा रहा है। इस खास दिन को लेकर दुनिया भर में लोग उत्साहित हैं।

मां एक ऐसा शब्द है, जिसमें पूरा ब्रह्मांड समाहित है। वह बच्चे की पहली गुरु होती है, जो उसे इस दुनिया में आने से पहले ही जीवन जीने का पाठ सिखाती है। मां की ममता, त्याग, प्रेम और बलिदान की किसी चीज से तुलना ही नहीं की जा सकती। इसी अनमोल रिश्ते को सम्मान देने के लिए हर साल मई माह के दूसरे रविवार को’मदर्स डे’ मनाया जाता है। साल 2025 में यह दिन आज 11 मई को मनाया जा रहा है। यह दिन माताओं के प्रति आभार और प्रेम प्रकट करने का विशेष अवसर होता है। भारत में भी मातृ दिवस को मई महीने के दूसरे रविवार को मनाया जाता है।

मातृ दिवस (मदर्स डे) की शुरुआत अमेरिका से हुई। एना जार्विस नामक महिला ने अपनी मां की स्मृति में यह दिन शुरू किया। एना की मां एक समाजसेविका थीं और उन्होंने महिलाओं की स्थिति सुधारने के लिए काफी कार्य किए थे। एना ने 1908 में पहली बार मदर्स डे मनाया और 1914 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति वुडरो विल्सन ने इसे राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया। इसके बाद यह दिन दुनिया के कई देशों में मनाया जाने लगा।

मां का स्थान ईश्वर से भी ऊपर है। हमारी पुराणों-ग्रंथों में मां के रूप को विशेष स्थान दिया गया है। मां एक बच्चे के जीवन में मार्गदर्शक, सहेली और प्रेरणास्त्रोत की भूमिका निभाती है। इतना ही नहीं मां अपने बच्चे के लिए भोजन-पानी, नींद, आराम और खुशी तक छोड़ सकती है। चाहे हम कितने ही बड़े क्यों न हो जाए जब डर लगता है, मन उदास हो या कोई तकलीफ होती है, तो मां की गोद में ही सुकून मिलता है। मां की ममता ऐसी होती है, जो बिना किसी अपेक्षा के सिर्फ देना जानती है। वह हर परिस्थिति में अपने बच्चों के लिए ढाल बनकर खड़ी रहती है।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अपने माता-पिता के साथ समय नहीं बिता पाते। मदर्स डे एक ऐसा अवसर है, जब हम रुककर अपनी मां को धन्यवाद कह सकते हैं। यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि हमारी जिंदगी में जो भी सुख-सुविधाएं हैं, उनमें मां का त्याग और परिश्रम छिपा है। मदर्स डे केवल एक दिन मां को सम्मान देने का दिन नहीं है, बल्कि यह हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि हम साल के बाकी दिनों में मां के लिए क्या कर सकते हैं और कैसे इतनी व्यस्तता के बीच उनके लिए समय निकाल सकते हैं।

मां ने हमें जन्म दिया है, लेकिन उसके साथ ही उसने हमें जीवन जीने की कला भी सिखाई है। मां अपने बच्चों की खुशी के लिए बहुत तकलीफें सहती है, लेकिन बदले में कुछ नहीं चाहती। ऐसे में हमारा यह फर्ज बनता है कि हम उनके प्रति अपने प्रेम, सम्मान और कृतज्ञता को रोजाना व्यक्त करें। हमें चाहिए कि हम मां के साथ समय बिताएं, उनकी भावनाओं को समझें और उनके बुढ़ापे में उनका सहारा बनें। अगर वह बीमार हों तो उनका इलाज कराएं, उनकी देखभाल करें।

मदर्स डे औपचारिकता निभाने का नहीं दिल से मां के प्रति प्रेम और आभार जताने का दिन है। मां की ममता और त्याग को शब्दों में समेट पाना असंभव है। मदर्स डे 2025 के इस मौके पर आइए हम यह संकल्प लें कि हम अपनी मां को हर दिन सम्मान देंगे, उनसे बातचीत करेंगे और उन्हें अपने जीवन की सबसे पहली प्राथमिकता बनाएंगे।

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