लुंबिनी को राजनीति से ऊपर रखा जाए

यह शांति की भूमि है: ABTO प्रदेश अध्यक्ष

मनोज कुमार त्रिपाठी 

लुंबिनी। एसोसिएशन ऑफ बुद्धिस्ट टूर ऑपरेटर्स (ABTO) ने लुंबिनी को वैश्विक बौद्ध पर्यटन के केंद्र के रूप में सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ABTO की ओर से जारी Ref. No. 01317/ABTO-03/2026 के तहत अशोक कुमार गुप्ता (Ashoka Lodge & Catering, Lumbini) को ABTO Advisory Board (Honorary) में Lumbini City, Nepal Head के रूप में मनोनीत किया गया है। यह नियुक्ति 12 दिसंबर 2025 से 9 दिसंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी।

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ABTO प्रदेश अध्यक्ष ने इस अवसर पर कहा कि लुंबिनी को राजनीति और आंदोलनों से पूरी तरह मुक्त रखा जाना चाहिए, क्योंकि यह भगवान गौतम बुद्ध की जन्मभूमि और विश्व शांति का प्रतीक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बुद्धिज़्म राजनीति या आंदोलन नहीं सिखाता, बल्कि शांति, करुणा और अहिंसा का मार्ग दिखाता है। लगातार हो रहे राजनीतिक आंदोलनों के कारण लुंबिनी की पवित्रता और पर्यटन दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

उन्होंने मांग की कि लुंबिनी के 10 किलोमीटर के दायरे को आंदोलन निषेध क्षेत्र घोषित किया जाए, ताकि इस पवित्र भूमि पर केवल बुद्ध का विचार ही लागू हो।

ABTO द्वारा जारी पत्र में यह नियुक्ति मानवता, शांति, पर्यटन, प्रकृति, अध्यात्म और संस्कृति के वैश्विक प्रचार के उद्देश्य से की गई है। पत्र में ABTO का मूल संदेश दोहराया गया —

“Sharing & Service to All”

अर्थात जो भी जानकारी, संसाधन और सहयोग ABTO के पास है, उसे पर्यटकों, तीर्थयात्रियों और सदस्यों के साथ शांति और सौहार्द के साथ साझा किया जाएगा।

प्रदेश अध्यक्ष ने भारत–नेपाल बॉर्डर पर आने वाले बौद्ध श्रद्धालुओं की समस्याओं को उठाते हुए कहा कि इमिग्रेशन पर शौचालय, बाथरूम, पेयजल और फास्ट-ट्रैक सुविधा अनिवार्य होनी चाहिए। साथ ही, आध्यात्मिक यात्रियों के लिए विशेष बैगेज टैग सिस्टम लागू करने की मांग की गई, ताकि अनावश्यक जांच से उन्हें राहत मिले।

उन्होंने बताया कि थाईलैंड, कोरिया सहित कई देशों से आने वाले पर्यटक बॉर्डर अव्यवस्था के कारण लुंबिनी में रुके बिना लौट जाते हैं, जिससे पर्यटन और स्थानीय रोजगार को नुकसान होता है।

ABTO ने JTS (Joint Together) जैसे संयुक्त बौद्ध टूर कार्यक्रमों की सराहना करते हुए भारत के बोधगया, राजगीर, नालंदा और नेपाल के लुंबिनी, रामग्राम, देवदह को जोड़ने वाले बौद्ध सर्किट को और मजबूत करने पर ज़ोर दिया। साथ ही ककरहवा बॉर्डर और सिद्धार्थ राजमार्ग के सुंदरीकरण की मांग भी दोहराई गई।

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