३०४वीं पृथ्वी जयंती पर माधव कल्पित का राष्ट्रघोष

“राष्ट्र पहले, भ्रष्टाचार पर वार और जेन-जी को सत्ता के केंद्र में लाने का आह्वान”

काठमांडू।

३०४वीं पृथ्वी जयंती एवं राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर नागरिक बचाउ दल नेपाल के पार्टी सभापति माधव कल्पित ने राष्ट्रनिर्माता पृथ्वी नारायण शाह की दिव्य वाणियों को आधार बनाते हुए देश की राजनीति, समाज और अर्थव्यवस्था पर तीखा, निर्भीक और दूरदर्शी संबोधन दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह दिवस केवल माल्यार्पण और औपचारिक भाषणों का नहीं, बल्कि सच बोलने, आत्ममंथन करने और राष्ट्र के भविष्य पर निर्णायक रुख अपनाने का दिन है।

 

 

माधव कल्पित ने पृथ्वी नारायण शाह के अमर कथन—

“यह देश चार जात छत्तीस वर्णों का फूलबारी है”—

का उल्लेख करते हुए कहा कि नेपाल की विविधता उसकी सबसे बड़ी शक्ति है, लेकिन आज उसी विविधता को स्वार्थी राजनीति के ज़रिये विभाजन का औज़ार बनाया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि देश राजनीतिक अस्थिरता, दिशाहीन नीतियों और सत्ता-केंद्रित दलगत गणित में उलझा हुआ है, जबकि भ्रष्टाचार संगठित, संरक्षित और निर्भीक होता जा रहा है।

उन्होंने पृथ्वी नारायण शाह की ऐतिहासिक चेतावनी दोहराते हुए कहा—

“घूस लेने और देने वाले दोनों देश के शत्रु हैं।”

कल्पित ने जोर देकर कहा कि यह कथन आज भी राष्ट्र रक्षा का स्पष्ट ब्लूप्रिंट है, जिसे लागू किए बिना नेपाल आगे नहीं बढ़ सकता।

 

जनता की हालत पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि “प्रजा मोटी होगी तो दरबार मज़बूत होगा” की अवधारणा के उलट आज आम नागरिक महँगाई, बेरोज़गारी, कर्ज़, अन्याय और अपमान से जूझ रहा है। साथ ही उन्होंने विदेशी हस्तक्षेप पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि राष्ट्रीय हितों से समझौता कर बाहरी प्रभावों को प्राथमिकता देना देश की संप्रभुता के लिए घातक है।

जेन-जी पर बड़ा दांव

अपने संबोधन में माधव कल्पित ने जेन-जी (नई पीढ़ी) की भूमिका को निर्णायक बताते हुए कहा कि आज यह पीढ़ी सड़कों पर है, क्योंकि वह न नारों से बहलती है, न खोखली विचारधाराओं से बँधती है। जेन-जी न्याय, पारदर्शिता और जवाबदेही चाहती है और समझ चुकी है कि संकट व्यक्तियों का नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था का है।

स्पष्ट कार्ययोजना

माधव कल्पित ने देश के लिए ठोस दिशा रखते हुए कहा कि अब समय आ गया है—

राष्ट्रीय एकता को सर्वोच्च नीति बनाने का

भ्रष्टाचार पर शून्य सहनशीलता लागू करने का

घूस लेने और देने—दोनों को सार्वजनिक शत्रु मानकर कठोर कार्रवाई करने का

राष्ट्र से ऊपर किसी भी दल, नेता या स्वार्थ को न रखने की व्यवस्था लागू करने का

जेन-जी को नीति निर्माण और निर्णय प्रक्रिया के केंद्र में लाने का

अंत में उन्होंने नागरिकों से भावुक और दृढ़ अपील की—

“फूट नहीं, एकता चुनें;

घूस नहीं, ईमानदारी चुनें;

डर नहीं, प्रतिरोध करें;

निराशा नहीं, आशा फैलाएँ।”

उन्होंने कहा कि पृथ्वी नारायण शाह के दिव्य उपदेश इतिहास नहीं, बल्कि आज भी राष्ट्र को दिशा देने वाला जीवित दर्शन हैं।

कार्यक्रम का समापन नारों के साथ हुआ—

“जय ३०४वीं पृथ्वी जयंती, जय राष्ट्रीय एकता दिवस, जय जागृत जेन-जी, जय नेपाल।”

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