झापा में 91 दिनों तक मंचन कर ‘मुना मदन’ ने रचा इतिहास

मनोज कुमार त्रिपाठी

झापा। क्षितिज नाट्य प्रतिष्ठान द्वारा निर्मित महाकवि लक्ष्मीप्रसाद देवकोटा की कालजयी रचना ‘मुना मदन’ का झापा नाटक घर में लगातार 91 दिनों तक सफल मंचन हुआ, जिसने स्थानीय रंगमंच के इतिहास में एक नई उपलब्धि जोड़ दी है।

 

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नाट्य प्रतिष्ठान झापा के केंद्रीय अध्यक्ष एवं झापा नाटक घर के निर्माण परिकल्पनाकार माधव कल्पित की परिकल्पना तथा गजेन्द्र खतिवडा के नाट्य रूपांतरण व निर्देशन में तैयार इस नाटक को दर्शकों का अपार स्नेह और सराहना मिली। नाट्य प्रतिष्ठान के कार्यकारी निर्देशक एवं नाटक के व्यवस्थापक राजकुमार भट्टराई के अनुसार, नाटक का मंचन 5 जेठ 2082 से शुरू होकर 2082 मंसिर के अंतिम सप्ताह तक चला।

मंचन अवधि के दौरान झापा जिले के पांच दर्जन से अधिक विद्यालयों के शिक्षक, विद्यार्थी एवं अभिभावक स्वयं नाटक घर पहुंचकर ‘मुना मदन’ का अवलोकन करने पहुंचे। परिकल्पनाकार माधव कल्पित ने बताया कि इस नाटक ने शिक्षा, साहित्य और रंगमंच के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य किया है।

नाटक में गजेन्द्र खतिवडा, राजकुमार भट्टराई, निर्मला भंडारी, विवेक मिश्र, संतोष तामांग वाङ्वो, दीपा शिवाकोटी, प्रज्ज्वल भट्टराई, पारस तामांग, राकेश दर्नाल, सम्पदा राई, पूर्णिमा निर्दोष, आरजू पौड्याल और आयुष सुजिको ने सशक्त अभिनय प्रस्तुत किया। वहीं नाट्य प्रतिष्ठान की उपाध्यक्ष सुजना खतिवडा सहित हरिप्रसाद भंडारी, सृष्टि आचार्य और समीक्षा खतिवडा की विशेष भूमिकाएं रहीं, यह जानकारी निर्देशक गजेन्द्र खतिवडा ने दी।

नाटक देखने के बाद विवेकाश्रम के अध्यक्ष व्यासाचार्य किशोर गौतम ने कहा कि देवकोटा की ‘मुना मदन’ आज के नेपाली समाज में भी उतनी ही प्रासंगिक है। जिस प्रकार मदन उस समय ल्हासा जाने को विवश हुआ था, उसी तरह आज के नेपाली युवा सऊदी अरब, कतर और मलेशिया जाने को मजबूर हैं और कई बार शव के रूप में स्वदेश लौटते हैं—इस मार्मिक यथार्थ को नाटक ने प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है।

91 दिनों के सफल मंचन के बाद नाटक अब विधिवत समापन की ओर बढ़ चुका है। इसके साथ ही क्षितिज नाट्य प्रतिष्ठान दर्शकों की रुचि और नाटक के प्रति बढ़ते आकर्षण को देखते हुए कक्षा 12 के पाठ्यक्रम पर आधारित, भीमनिधि दिवारी द्वारा लिखित नाटक ‘द–भूल’ की तैयारी में जुट गया है, यह जानकारी परिकल्पनाकार माधव कल्पित ने दी।

समापन समारोह के प्रमुख अतिथि विनोद पोखरेल ने बताया कि माधव कल्पित की ही परिकल्पना और नेतृत्व में लगभग सात वर्ष पहले सड़कों पर एक-एक ईंट मांगकर शुरू किया गया यह नाट्य अभियान आज हजारों विद्यार्थियों और दर्शकों के लिए एक श्रव्य–दृश्य पाठशाला के रूप में विकसित हो चुका है।

झापा में 91 दिनों तक लगातार मंचन हुआ ‘मुना मदन’ नेपाली रंगमंच, साहित्य और सामाजिक यथार्थ को एक साथ प्रस्तुत करते हुए एक उल्लेखनीय उपलब्धि के रूप में सामने आया है।

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