नेपाल में दुर्गा प्रसाई के नेतृत्व में 7 मंसिर का देशव्यापी शांतिपूर्ण आंदोलन और नागरिक समर्थन

धर्म केवल पूजा या अनुष्ठान नहीं बल्कि सत्य, नैतिकता और आचरण का प्रतीक है – दुर्गा प्रसाई केंद्रीय अध्यक्ष राष्ट्र , राष्ट्रीयता,धर्म, संस्कृति और नागरिक बचाओ अभियान नेपाल

मनोज कुमार त्रिपाठी

काठमांडू! नेपाल की वर्तमान राजनीतिक स्थिति अस्थिरता, भ्रष्टाचार, विदेशी प्रभाव और नैतिक पतन के दलदल में फंसी हुई है। जनता निराश है, युवा विदेशों में रोजगार की तलाश में धकेले जा रहे हैं, और देश का स्वाभिमान और अस्मिता कमजोर होती जा रही है। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में दुर्गा प्रसाई के नेतृत्व में आगामी 7 मंसिर (22 नवम्बर) को होने वाला देशव्यापी शांतिपूर्ण आंदोलन एक नई आशा की किरण के रूप में उभर रहा है। इस अभियान की जानकारी केंद्रीय प्रवक्ता माधव कल्पित ने दी है।

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दुर्गा प्रसाई पिछले कुछ वर्षों से लगातार राष्ट्र, धर्म और नागरिक अधिकारों के पक्ष में आवाज उठाते रहे हैं। उन्होंने दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर देश और जनता के भविष्य के लिए सत्य बोलने का साहस दिखाया है। उनके विचारों का मूल आधार “सत्य, धर्म और राष्ट्र” की त्रिसूत्रीय दर्शन पर टिका हुआ है। प्रसाई का मानना है कि “देश को बचाना केवल राजनीतिक सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि सोच, नीति और नैतिकता के पुनर्जागरण की आवश्यकता है।”

7 मंसिर का यह आंदोलन उसी सोच की निरंतरता है। यह किसी दल या व्यक्ति पर केंद्रित नहीं है, बल्कि देश और जनचेतना का आंदोलन है। इसमें सहभागी नागरिक किसी भी प्रकार की हिंसा, तोड़फोड़ या द्वेष के माध्यम से नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण ढंग से अपनी असंतुष्टि और सुधार की मांग व्यक्त करेंगे।

आंदोलन का मुख्य एजेंडा
भ्रष्टाचार का अंत, विदेशी हस्तक्षेप के विरुद्ध आवाज,
शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार,राष्ट्रवादी नीति और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था का विकास है।

इस शांतिपूर्ण आंदोलन को लेकर नागरिकों का समर्थन दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। छात्र, शिक्षक, व्यापारी, किसान, बुद्धिजीवी और विदेश में बसे नेपाली नागरिक भी इस आंदोलन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रख रहे हैं। उनके अनुसार, अब देश में परिवर्तन की शक्ति दलगत राजनीति में नहीं, बल्कि जनता की एकजुट आवाज में निहित है।

जैसा कि प्रसाई बार-बार कहते हैं “देश को बदलने की शक्ति जनता में ही है, जनता के समर्थन के बिना कोई भी व्यवस्था टिक नहीं सकती।”

दुर्गा प्रसाई इस आंदोलन को धार्मिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय मूल्यों पर आधारित बनाना चाहते हैं। उनका विश्वास है कि धर्म केवल पूजा या अनुष्ठान नहीं, बल्कि सत्य, नैतिकता और आचरण का प्रतीक है। इसलिए यह आंदोलन केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक पुनर्जागरण की शुरुआत भी है।

अंततः, 7 मंसिर ( 22 नवंबर) का यह देशव्यापी शांतिपूर्ण आंदोलन, दुर्गा प्रसाई के नेतृत्व में जागृत नागरिक चेतना और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। इस आंदोलन से हिंसा नहीं, बल्कि विचार, नैतिकता और परिवर्तन का मार्ग दिखने की उम्मीद की जा रही है। यदि इस जनचेतना की लहर को नागरिकों ने निरंतरता दी, तो नेपाल पुनः धर्म, सत्य और स्वाभिमान पर आधारित समृद्ध राष्ट्र की दिशा में आगे बढ़ेगा

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