मनोज कुमार त्रिपाठी
भैरहवा/काठमांडू।
नेपाल के पूर्व अंतरिम सांसद और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (डिप्लोमेट समूह) के पीबीएम विनोद कुमार उपाध्याय ने देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि नेपाल इस समय गरीबी, आर्थिक संकट और व्यापक भ्रष्टाचार की वजह से भारी उथल-पुथल से गुजर रहा है, और जनता का धैर्य पूरी तरह टूट चुका है।

जेन-जी आंदोलन ने सत्ता की नींव हिला दी
उपाध्याय के अनुसार हाल में हुआ जेन-जी युवा आंदोलन भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ जनता की भावनाओं का स्वाभाविक विस्फोट था।
23 तारीख को हुई हिंसा में 24–25 लोगों की मौत हुई, जिसके अगले दिन पूरे देश में सरकारी दफ्तरों और प्रभावशाली भ्रष्ट नेताओं के खिलाफ आक्रोश भड़क उठा।
उन्होंने कहा कि जनता ने इस आंदोलन को खुली मान्यता दी और बदलाव की मांग को मजबूत किया।
“वर्तमान अंतरिम सरकार जनता की भावना का प्रतिनिधित्व नहीं करती”
उपाध्याय ने मौजूदा अंतरिम सरकार को अमेरिकी प्रभाव वाली ‘कटु सरकार’ बताया।
उन्होंने कहा कि यह सरकार सुशासन, भ्रष्टाचार उन्मूलन, नई व्यवस्था और संविधान संशोधन जैसी जनता की मूल मांगों पर खरा उतरने में विफल है।
चुनाव पर खतरा—1300 हथियार अब तक बरामद नहीं
उन्होंने खुलासा किया कि आंदोलन के दौरान सुरक्षा बलों से तेरह सौ हथियार छीन लिए गए, जो अब तक वापस नहीं मिले हैं।
उपाध्याय के अनुसार इस हालात में सुरक्षित चुनाव कराना बेहद कठिन है और सरकार की घोषणा के बावजूद चुनाव होने की संभावना बहुत कम दिखाई देती है।
नई राष्ट्रीय अंतरिम सरकार बनाने की मांग
पूर्व सांसद ने कहा कि मौजूदा अंतरिम सरकार को तुरंत बदला जाए और उसकी जगह देशभक्त प्रतिनिधियों, जेन-जी आंदोलन के नेताओं, भ्रष्टाचार विरोधी राजनीतिक दलों और नागरिक समाज की भागीदारी वाली नई सरकार बनाई जाए।
उन्होंने कहा कि ऐसी ही सरकार संविधान संशोधन और राज्य पुनर्संरचना के जरिए देश को नई दिशा दे सकती है।
राजतंत्र की वापसी पर स्पष्ट टिप्पणी
राजतंत्र की संभावित वापसी पर उन्होंने कहा कि यह कल्पना अव्यावहारिक है।
उनके शब्दों में, “राजतंत्र उस पानी की तरह है जो हाथ से फिसलकर वापस नहीं आता।”
उपाध्याय ने कहा कि राजतंत्र से समस्याएँ हल नहीं होंगी और असली समाधान एक मजबूत लोकतांत्रिक पुनर्गठन में है।


