नेपाल ने पहली बार खुलकर बोला- हमारे देश के रास्ते आतंकी भेज रहा पाकिस्तान भारत को किया आगाह 

IC-814 अपहरण से पहलगाम हमले तक नेपाल भी आतंक के असर से अछूता नहीं रहा

आतंकी गुटों से भारत को गंभीर खतरा- सुनील बहादुर थापा नेपाली राष्ट्रपति के सलाहकार 

मनोज कुमार त्रिपाठी 

काठमांडू! पाकिस्तान के आतंकी मंसूबों की पोल इस बार नेपाल ने खोल दी है। नेपाल ने पहली बार साफ तौर पर माना कि पाकिस्तान में पाले गए आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद नेपाल की जमीन का इस्तेमाल भारत में हमले करने के लिए कर सकते हैं। नेपाल के राष्ट्रपति के सलाहकार सुनील बहादुर थापा ने चेतावनी दी कि इन आतंकी गुटों से भारत को गंभीर खतरा है नेपाल एक ट्रांजिट रूट के रूप में उनके निशाने पर है। नेपाल ने भारत से मदद मांगी है।

नेपाल इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन एंड एंगेजमेंट की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में सुनील बहादुर थापा ने कहा, पाकिस्तान में पाले गए आतंकी न केवल भारत बल्कि पूरे साउथ एशिया की स्थिरता के लिए चुनौती बन चुके हैं। इसमें उन आतंकी हमलों की चर्चा की गई जिनका असर नेपाल तक पहुंचा। साल 1999 में काठमांडू से उड़ान भरने वाले इंडियन एयरलाइंस के विमान IC-814 को अपहरण के बाद अफगानिस्तान के कांधार ले जाया गया था। वहीं मई 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हमले में 26 पर्यटकों की जान गई थी, जिनमें नेपाल के रूपंदेही जिले के बुटवल शहर के निवासी सुदीप न्योपाने भी शामिल था। यह हमला लश्कर-ए-तैयबा के पाले गए आतंकियों ने किया था। दोनों घटनाएं बताती हैं कि पाकिस्तान नेपाल और नेपाल के लोगों के लिए खतरा बन रहा है।

 

भारत से मांगा सहयोग, ऑपरेशन सिंदूर की तारीफ

 

थापा ने आतंकियों के खात्मे के लिए चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’की भी जमकर तारीफ की। नेपाल ने कहा, हमें भारत से खुफिया जानकारी शेयर करनी होगी, बॉर्डर पर ज्वाइंट एक्सरसाइज करनी होगी, ताकि आतंकियों की घुसपैठ रोकी जा सके। हम इस बारे में लगातार भारत के संपर्क में हैं। नेपाल ने कहा, आतंकवाद तभी रोका जा सकता है, जब उसे मिलने वाले धन पर लगाम लगाई जाए। क्योंकि यही नेटवर्क आतंक के लिए फंडिंग का जरिया बनते हैं।

भारत से मिलकर एक सिस्टम बनाना होगा

 

एक्सपर्ट ने कहा, हमें आतंकवाद के खात्मे के लिए भारत के साथ मिलकर एक सिस्टम डेवलप करना होगा। सार्क देशों के बीच कम्युनिकेशन बढ़ाना होगा। भरोसा पैदा करना होगा और इस तरह की खुफिया जानकारी शेयर करनी होगी, जो दूसरे देशों के लिए खतरा बनते हैं। जब तक ऐसा नहीं होता, हम आतंकवाद का समूल नाश नहीं कर सकते।

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