आगामी चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों का बड़ा फैसला, माधव कल्पित और दुर्गा प्रसाई के नेतृत्व से जुड़ा आंदोलन, पाँच सूत्रीय मांगों के साथ चुनाव बहिष्कार का ऐलान

मनोज कुमार त्रिपाठी

काठमांडू। नागरिक बचाउ दल, नेपाल (सेव सिटिजन पार्टी–एससीपीएन) के तत्वावधान में 2082 पौष 6 को होटल एभरेस्ट, काठमांडू में “आसन्न निर्वाचन और राजनीतिक दलों की अवधारणा” विषय पर चर्चा एवं अंतरक्रिया कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में देश की विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों के साथ सामाजिक-राजनीतिक चिंतक माधव कल्पित की उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही। प्रस्ताव संख्या–1 पर हुई विस्तृत चर्चा के बाद आगामी चुनाव को लेकर एक अहम राजनीतिक रुख सामने आया।

 

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चर्चा के उपरांत सभी सहभागी दलों ने सर्वसम्मति से पाँच सूत्रीय मांगें रखते हुए स्पष्ट किया कि यदि इन मांगों को पूरा नहीं किया गया तो वे आगामी निर्वाचन में भाग नहीं लेंगे। प्रमुख मांगों में वर्ष 2079 फागुन 1 को मेची नदी तट से दुर्गा प्रसाई के नेतृत्व में शुरू किए गए नागरिक बचाउ महाअभियान के तहत भ्रष्टाचार विरोधी अभियान की निष्पक्ष जांच, सभी भ्रष्टाचार फाइलें खोलने और दोषियों को कानूनी दायरे में लाने की मांग शामिल है।

राजनीतिक दलों ने जेन-जी आंदोलन को व्यवस्था परिवर्तन का आंदोलन बताते हुए कहा कि आंदोलन के बाद बनी अंतरिम सरकार असंवैधानिक है और उसी सरकार द्वारा घोषित चुनाव जेन-जी आंदोलन और बलिदानों का अपमान है। इस क्रम में संविधान की खारिजी, अंतरिम सरकार के पुनर्गठन तथा उसी आधार पर नए निर्वाचन की घोषणा की मांग उठाई गई। साथ ही महंगी और खर्चीली चुनाव प्रणाली तथा थ्रेसहोल्ड प्रणाली को समाप्त करने की भी जोरदार मांग की गई।

बैठक में जेन-जी आंदोलन के दौरान हुए दमन, हिंसा और 76 नेपाली युवाओं की मौत का मुद्दा उठाते हुए कहा गया कि 2084 में होने वाले चुनाव को 2082 में कराना न तो तर्कसंगत है और न ही जनभावनाओं के अनुरूप। नेताओं ने कहा कि देश की धरोहरों और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाकर कराए जा रहे चुनाव से वास्तविक परिवर्तन संभव नहीं है। इन्हीं आधारों पर राजनीतिक दलों ने दुर्गा प्रसाई के नेतृत्व में घोषित होने वाले नागरिक बचाउ आंदोलन के प्रति ऐक्यबद्धता जताते हुए चुनाव बहिष्कार का निर्णय लिया। कार्यक्रम के अंत में नागरिक बचाउ दल के अध्यक्ष माधव प्रसाद खतिवडा ने कहा कि यह अभियान सभी वर्गों और समुदायों को जोड़कर एक सशक्त नेपाल के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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