संविधान से बाहर राजा की बहाली संभव नहीं, लोकतंत्र से ही होगा हर निर्णय – सरवेन्द्र नाथ शुक्ला

मनोज कुमार त्रिपाठी 

रुपन्देही। Janata Samajbadi Party, Nepal (जसपा नेपाल) से रुपन्देही क्षेत्र नंबर–४ के प्रतिनिधि सभा सदस्य प्रत्याशी Sarvendra Nath Shukla ने देश में चल रही राजतंत्र बहाली की चर्चाओं पर स्पष्ट और कड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि संविधान से बाहर जाकर किसी भी व्यक्ति को राजा घोषित करना न तो संभव है और न ही वैधानिक।

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शुक्ला ने कहा, “राजा को सड़क से ले जाकर दरबार में बैठा देने से कोई राजा नहीं बन जाता। राजा वही होगा जिसे संविधान और कानून मान्यता देंगे। जब तक संवैधानिक प्रक्रिया के तहत कोई प्रावधान नहीं किया जाता, तब तक इस प्रकार की सभी बातें केवल अटकलें हैं।” उन्होंने स्पष्ट किया कि नेपाल एक लोकतांत्रिक गणराज्य है और यहां की शासन व्यवस्था संविधान द्वारा संचालित होती है।

उन्होंने कहा कि कुछ हजार या लाख लोगों की इच्छा से करोड़ों नागरिकों की भावनाओं और संवैधानिक व्यवस्था को बदला नहीं जा सकता। वर्तमान संविधान में राजतंत्र के लिए कोई स्थान नहीं है, इसलिए इस प्रकार की गतिविधियां पूरी तरह असंवैधानिक और अवैधानिक हैं तथा इनका कोई कानूनी महत्व नहीं है।

शुक्ला ने जोर देते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है और संविधान देश का सर्वोच्च दस्तावेज है। किसी भी प्रकार का परिवर्तन केवल विधिसम्मत प्रक्रिया से ही संभव है। उन्होंने अपील की कि देश को अस्थिर करने वाली चर्चाओं के बजाय लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

इसी क्रम में सिद्धार्थ संजाल द्वारा मौर्या होटल में आयोजित प्रेस मीट, जिसमें क्षेत्र नंबर–३ के प्रत्याशियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप हुए, उस पर प्रतिक्रिया देते हुए शुक्ला ने कहा कि वे उस कार्यक्रम में उपस्थित नहीं थे। हालांकि मीडिया में आई खबरों के आधार पर उन्होंने कहा कि यदि जनता की ओर से किसी भी प्रत्याशी पर सवाल उठाए गए हैं, तो संबंधित उम्मीदवारों को जनता के सामने स्पष्ट और पारदर्शी जवाब देना चाहिए।

उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में जवाबदेही सबसे महत्वपूर्ण है। जनता सवाल पूछती है और जनप्रतिनिधियों का कर्तव्य है कि वे उन सवालों का ईमानदारी से उत्तर दें। पारदर्शिता और उत्तरदायित्व से ही जनता का विश्वास मजबूत होता है।”

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