आंतरिक शांति ही बाहरी शांति की कुंजी है – सतगुरू जग्गी वासुदेव
मनोज कुमार त्रिपाठी
भैरहवा नेपाल! नेपाल इन दिनों एक विशेष आध्यात्मिक माहौल में डूबा हुआ है। विश्वविख्यात आध्यात्मिक गुरु, समाज सुधारक और ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सतगुरु, जिन्हें जग्गी वासुदेव के नाम से भी जाना जाता है, का धार्मिक दौरा देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
सतगुरु का मुख्य आश्रम कोयंबटूर, तमिलनाडु में स्थित है, और उनकी संस्था की दक्षिण भारत, विशेषकर केरल में मजबूत उपस्थिति है। केरल में उन्होंने कई सामाजिक और मानवीय पहलें की हैं, खासकर संकट के समय। केरल में आई भीषण बाढ़ के दौरान उन्होंने प्रभावित लोगों को सहायता और मार्गदर्शन प्रदान किया। उनकी आध्यात्मिक शिक्षाएं, जैसे कि इनर इंजीनियरिंग कार्यक्रम, मलयालम भाषा में भी उपलब्ध हैं, जिससे केरल के लोग अपनी मातृभाषा में उनसे जुड़ पाते हैं।

सतगुरु का मानना है कि “आंतरिक शांति ही बाहरी शांति की कुंजी है।” इसी संदेश को लेकर वे पूरी दुनिया में आध्यात्मिक यात्राएं करते रहे हैं और लाखों लोगों को योग, ध्यान और सेवा के माध्यम से प्रेरित कर चुके हैं।
इस बार सतगुरु एक महीने के विशेष धार्मिक दौरे पर नेपाल आए हैं, जिसके अंतर्गत वे मुक्तिनाथ से कैलाश मानसरोवर तक पैदल यात्रा कर रहे हैं। इस अद्वितीय यात्रा का उद्देश्य हिमालयी संस्कृति और अध्यात्म की गहराइयों को अनुभव करना, प्रकृति संरक्षण का संदेश देना और लोगों को आध्यात्मिक रूप से जोड़ना है।


नेपाल में अपने दौरे के दौरान सतगुरु ने काठमांडू, ललितपुर और पोखरा में विशेष सभाओं को संबोधित किया। इन आयोजनों में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। उन्होंने मानवता के महत्व, पर्यावरण संरक्षण और आपसी भाईचारे पर जोर देते हुए प्रेरणादायक संदेश दिए।
इस अवसर पर डीसीपी भैरहवा, ट्रैफिक इंस्पेक्टर रंजु के.सी. इलाका प्रहरी बेलहिया नेपाल के इंस्पेक्टर मुकेश कुमार न्यौपाने, चौकी प्रभारी सोनौली बृजभान यादव, भैरहवा भंसार इंटरमोडल के व्यवस्थापक रवि पारिख और सोनौली कोतवाली प्रभारी अजीत प्रताप सिंह जैसे सम्मानित अधिकारी भी मौजूद रहे, जिन्होंने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई।


दौरे के दौरान वृक्षारोपण अभियान, स्वच्छता अभियान और सामाजिक सेवा गतिविधियों का भी आयोजन किया गया, जिससे न केवल धार्मिक उत्साह बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की भावना भी बढ़ी।
सतगुरु का यह दौरा नेपाल के आध्यात्मिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होगा, जिसने श्रद्धालुओं में नई ऊर्जा और देश में एकता की भावना का संचार किया।










