मनोज कुमार त्रिपाठी
काठमांडू। नेपाल में आगामी फागुन 23 (वि.सं.) को होने वाले आम चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल बेहद गर्म हो चुका है। वरिष्ठ पत्रकार रामेश्वर भट्ट ने चुनावी परिदृश्य पर गहन विश्लेषण प्रस्तुत करते हुए कहा कि इस बार का चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ेगा।
रामेश्वर भट्ट के अनुसार, इस चुनाव में कुल 143 राजनीतिक दल पंजीकृत थे, जिनमें से 53 दलों ने अपने उम्मीदवारों की सूची दाखिल की है। संविधान के तहत किसी भी दल को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा पाने के लिए कम से कम 3 प्रतिशत मत प्राप्त करना अनिवार्य है। इस आधार पर उनका मानना है कि केवल 7–8 दल ही राष्ट्रीय पार्टी बनने की दहलीज पार कर पाएंगे, जबकि शेष दलों का अस्तित्व औपचारिक रूप से समाप्त हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि नेपाल की राजनीति इस समय दो स्पष्ट धाराओं में बंटी हुई है—एक ओर गणतंत्रवादी धारा, जिसमें अधिकांश राजनीतिक दल शामिल हैं, और दूसरी ओर राजतंत्रवादी धारा, जिसका प्रतिनिधित्व राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (राप्रपा) कर रही है। राप्रपा संवैधानिक राजतंत्र और हिंदू राष्ट्र की पुनः स्थापना की मांग के साथ चुनावी मैदान में उतरी है।
झापा की हाई-प्रोफाइल लड़ाई पर बड़ा संकेत
झापा क्षेत्र को लेकर पूछे गए सवाल पर भट्ट ने कहा कि सोशल मीडिया और प्रचार के कारण चर्चा दो बड़े नामों तक सीमित हो गई है—पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन शाह। ओली जहां झापा क्षेत्र नंबर 5 से लगातार मजबूत दावेदार रहे हैं, वहीं बालेन शाह को भावी प्रधानमंत्री के रूप में भी प्रचारित किया जा रहा है।
हालांकि उन्होंने चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के उम्मीदवार लक्ष्मी प्रसाद संरोला की स्थिति भी बेहद मजबूत है और यदि ओली व बालेन शाह दोनों हारते हैं तथा राप्रपा विजयी होती है, तो इसे असंभव नहीं बल्कि स्वाभाविक राजनीतिक परिणाम माना जाना चाहिए।
जेएनजी आंदोलन और विदेशी हस्तक्षेप का आरोप
जेएनजी आंदोलन को लेकर वरिष्ठ पत्रकार ने कहा कि इसकी शुरुआत भले ही छात्रों के स्वतःस्फूर्त आंदोलन के रूप में हुई हो, लेकिन बाद में इसमें विदेशी हस्तक्षेप साफ नजर आया। उनके अनुसार, आंदोलन को अमेरिका और कुछ यूरोपीय समूहों ने हाईजैक किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में बनी अंतरिम सरकार में अमेरिकी संगठनों से जुड़े लोग शामिल हुए, जिनमें से कई बाद में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी में चले गए। इससे उस पार्टी की भूमिका पर भी सवाल खड़े होते हैं।
रामेश्वर भट्ट ने स्पष्ट कहा कि नेपाल की राजनीति इस समय भूराजनीतिक खींचतान का केंद्र बन चुकी है, जहां अमेरिका, चीन और भारत अपने-अपने हित साधने की कोशिश में लगे हैं। ऐसे में यह चुनाव केवल नेपाल के भविष्य ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है।