मनोज कुमार त्रिपाठी
रूपन्देही, नेपाल ! रूपन्देही क्षेत्र संख्या-३ की राजनीतिक सरगर्मी इन दिनों चरम पर है। राष्ट्रीय प्रजातन्त्र पार्टी (राप्रपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री दीपक बोहरा के असामयिक निधन के बाद खाली हुई इस प्रतिष्ठित संसदीय सीट को लेकर देशभर में यह सवाल गूंज रहा है—अब अगला नेतृत्व कौन?

दीपक बोहरा न केवल एक कुशल राजनेता थे, बल्कि उन्हें एक दूरदर्शी विकास पुरुष के रूप में भी याद किया जाता है। उन्होंने रूपन्देही क्षेत्र-३ को जिस तरह से विकास की राह पर अग्रसर किया, वह जनता के दिलों में आज भी जीवंत है। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक संरचनाओं के क्षेत्र में उनका उल्लेखनीय योगदान रहा है।
अब जब यह सीट रिक्त हुई है, तो राजनीतिक विश्लेषकों और स्थानीय नेताओं की नजरें उनके उत्तराधिकारी के रूप में उनके छोटे बेटे प्रज्वल बोहरा पर टिकी हैं। व्यवसाय में सक्रिय और सामाजिक गतिविधियों में अग्रणी प्रज्वल बोहरा ने वर्षों तक अपने पिता के साथ कदम से कदम मिलाकर राजनीतिक कार्यक्रमों में भागीदारी निभाई है।

स्थानीय कार्यकर्ताओं और नेताओं की मानें तो राप्रपा नेतृत्व प्रज्वल को उम्मीदवार बनाकर न सिर्फ एक युवा चेहरे को आगे ला सकती है, बल्कि दिवंगत नेता की विरासत को भी मजबूती से आगे बढ़ाने का संदेश दे सकती है।
राप्रपा के कई वरिष्ठ नेताओं का भी यही मानना है कि प्रज्वल की उम्मीदवारी पार्टी के लिए एक भावनात्मक और रणनीतिक रूप से सशक्त कदम हो सकता है। इससे एक ओर जनता की सहानुभूति मिल सकती है, वहीं दूसरी ओर विकास की निरंतरता भी बनी रह सकती है।
अब सबकी नजर राप्रपा के आधिकारिक निर्णय पर है—क्या पार्टी दीपक बोहरा के सपनों को साकार करने के लिए उनके बेटे प्रज्वल बोहरा को मैदान में उतारेगी?

