मनोज कुमार त्रिपाठी
नौतनवां महराजगंज! 3050 वित्तविहीन विद्यालय प्रबन्धक संघ द्वारा आयोजित 14 वां स्थापना दिवस एवं वार्षिक अधिवेशन आज नौतनवां के जय हिन्द मैरेज हॉल में अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अनेक प्रबन्धक, शिक्षकगण, शिक्षाविद् और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षा के वास्तविक स्तंभों, यानी ग्रामीण एवं निजी वित्तविहीन विद्यालयों की समस्याओं को रेखांकित करना और उनके समाधान हेतु साझा प्रयास करना था।

मुख्य अतिथि के रूप में श्री राकेश मद्धेशिया, ब्लॉक प्रमुख (नौतनवां), श्री बृजेश मणि त्रिपाठी, नगर पालिका अध्यक्ष (नौतनवां), एवं श्री पवन दुबे, निदेशक (सरस्वती ग्रुप ऑफ कॉलेजेज) ने सभा को संबोधित किया। अपने संबोधन में सभी वक्ताओं ने कहा कि ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में वित्तविहीन विद्यालयों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है और सरकार को इस दिशा में ठोस नीति लानी चाहिए।
कार्यक्रम की आयोजना में अहम भूमिका निभाने वाले आयोजन समिति के सदस्य थे – श्री शिरीष पाण्डेय (प्रदेश संरक्षक), श्री राकेश शर्मा (प्रदेश संयोजक), श्री ई. बी. एन. मिश्र (जिलाध्यक्ष), श्री अवनीश कुमार मिश्र (जिला संगठन मंत्री), और श्री श्रीनाथ धर दुबे (जिला संयोजक)। इनके नेतृत्व में कार्यक्रम सफलतापूर्वक संचालित हुआ।

संगठन संरचना में प्रमुख पदाधिकारियों में शामिल श्री जयप्रकाश मिश्र (संस्थापक अध्यक्ष), श्री महेश राव (प्रदेश अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश), श्री राज कुमार जायसवाल (प्रान्तीय संरक्षक), श्री पुनीत मिश्र (निर्वतमान अध्यक्ष), तथा श्री एस. पी. गुप्त (वरिष्ठ प्रदेश संयोजक, उत्तर प्रदेश)।
ब्लॉक स्तर पर संगठन को मजबूती देने वाले पदाधिकारियों में श्री मनीष श्रीवास्तव (ब्लॉक अध्यक्ष, नौतनवां), श्री अभिलाष चौबे (ब्लॉक अध्यक्ष, बृजमनगंज), श्री आकर्ष श्रीवास्तव (ब्लॉक अध्यक्ष, पनियरा) तथा श्री महेन्द्र चौहान (ब्लॉक अध्यक्ष, लक्ष्मीपुर) की उपस्थिति विशेष उल्लेखनीय रही।

कार्यक्रम में यह उद्घोष सर्वत्र सुनाई दिया
“संगठन है सेवा, संघर्ष है शक्ति-चलो मिलकर करें सृजन की भक्ति”यह संदेश हर सदस्य के मन में आत्मबल का संचार कर गया।
कार्यक्रम का सौजन्य रामा स्टेशनर्स एण्ड स्पोर्ट्स, आर्यनगर, अग्रवाल भवन के सामने, गोरखपुर द्वारा किया गया।
यह अधिवेशन न केवल संगठन की एकजुटता का प्रतीक बना, बल्कि वित्तविहीन विद्यालयों की आवाज को नीतिगत स्तर तक पहुंचाने की दिशा में एक सार्थक प्रयास भी सिद्ध हुआ।



