भारत के गुजरात प्रदेश की वो वीरांगना जिसकी बहादुरी देख भाग खड़ा हुआ था आक्रांता मोहम्मद गोरी

फिर कभी नहीं किया भारत के इस राज्य पर हमला

वीरांगना रानी नायिकी देवी सोलंकी ने युद्ध में अपनी तलवार की वार से मुहम्मद गोरी की गुदा फाड़ कर उसे नपुंसक बना दिया था

ऐसे वीरांगना को मुस्लिम तुष्टीकरण करने वालों ने इतिहास से मिटा दिया

उमेश चन्द्र त्रिपाठी

मैकाले की शिक्षा पद्धति और वामपंथ रोग से ग्रसित इतिहासकार आपको यह सब इतिहास की कक्षा में कभी नहीं बताएंगे । इतिहासकार भारत की इस वीरांगना का उल्लेख कभी नहीं करते हैं, जब वे भारत के महान महिलाओं का उल्लेख करते है तब।

 

 

फिर भी वह हर महिला सशक्तिकरण अभियान के (आइकॅन) अनुप्रतीक होने की हकदार हैं। महान भारतियों पर लिखी हर किताब के पहले अध्याय में होने चाहिये। उस महान वीरांगना का नाम है गुजरात की रानी नायिकी देवी ।

1178 ईस्वी,माउंट आबू
ज्यादातर लोगों को नहीं पता होगा मोहम्मद गोरी को दो चीज की नशा थी एक खून की दूसरा हवस की। मोहम्मद गोरी एक हवसी दरिन्दा था। उसकी हवस की लत ने उसे नपुंसक बना दिया था, या वह नपुंसक पैदा हुआ था, या नायिकी देवी की तलवार ने उसे नपुंसक बना दिया था यह हम नहीं जानते। मोहम्मद गोरी किसी को नहीं बक्श्ता था औरत, मर्द, बच्चे यौन-गुलाम बनाकर रखता था। बाद में वह अपने यौन-गुलामों को अपने राज्य का वारिस बना दिया था । उसने जितने भी युद्ध किये उन सभी लड़ाईयों में जिहादी गोरी ने औरतों एवं नाबालिक कन्याओं का सामूहिक बलात्कार किया एवं वृद्ध पुरुष एवं वृद्ध महिलाओं को कसाइयों की तरह मौत के घाट उतार देता था। युवा, महिलाओं और बच्चों को यौन गुलाम बना दिया जाता था ।

 

 

भारत सबसे महत्वपूर्ण देश था। जिहादियों के लिए पहला खलीफा शासन के बाद जिहादियों ने भारत पर कई आक्रमण किये पर कामयाब नहीं हो पाया। भारत देश मूर्ति पूजकों का देश रहा है। प्राचीन आदि अनंत काल से इसलिए भारत को तबाह करना इनका हमेशा से कोशिश रहा। एक भारत के अलावा सम्पूर्ण विश्व इनके कब्जे में आगया था और 620 ईस्वी में इस्लाम के जन्म के साथ मूर्ति पूजकों पर बहुत क्रूर अत्याचार किया गया था। भारत के अलावा भी जितने भी मूर्ति पूजक देश थे उन सबका अस्तित्व मिटा दिया गया तलवार के बल पर भारत एक अंतिम मूर्ति पूजक देश रह गया। कुरान के मुताबिक जिहादी हिन्दू महिलाओं, बच्चों, और पुरुषों के साथ कुछ भी करने को आसमानी किताब के अनुसार अधिकार रखते हैं । मोहम्मद गोरी मुल्तान जीतने के बाद (जो अभी पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में है) गुजरात के मार्ग से होते हुए भारत के अन्य राज्य को भी जिहाद के खूनी खेल से तबाह करना चाहता था ।

मोहम्मद गोरी ने गुजरात की रानी नायिकी देवी की खूबसूरती के बारे में काफी कुछ सुन रखा था। रानी नायिकी देवी अपने नवजात शिशु भीमदेव सोलंकी को साथ लेकर गुजरात की राजपाट चलाती थी और गुजरात राज्य के धन समृद्धि से परिपूर्ण एक वैभवशाली राज्य था। इतना सब सुनने के बाद नरपिशाच मोहम्मद गोरी खुद को रोक नहीं पाया और 65000 से 73000 की बड़े पैमाने में जिहादी लुटेरों की सेना के साथ अन्हील्वारा गुजरात की राजधानी की और निकल पड़ा ।

रानी नायिकी देवी को ज्ञात था की उनका मुकाबला किस दरिन्दे से होने वाला है उनके पास जितने भी सैन्य बल थे सबको एकत्रित कर के गुजरात की सीमा की और बढ़ी और रानी नायिकी देवी ने रणनीति के तहत अपनी सेनाओं को तैयार किया। गुजरात सीमा के अन्दर आने से रोकना है बलात्कारी हत्यारों की सेना को गुजरात सीमा के बहार खदेड़ना है जितना संभव हो पाएगा ताकि कम से कम गुजरात की स्त्रियों एवं कन्याओं को भागने का वक्त मिले या तो प्राण त्यागने तक का वक्त मिले जिससे महिलाऐं एवं कन्या लूटेरों के हाथ से अपनी मान भंग एवं अश्मिता को लूटने से खुद को बचा पायें ।

जब दोनों सेना गुजरात राजधानी से चालीस मील दूर कायादारा में मिले गोरी ने सन्देश भेजा रानी और उसके बच्चे को मुझे सौंप दो और तुम सभी अपनी-अपनी महिलाओं एवं कन्याओं के साथ अपनी धन दौलत सब मुझे दे दो तो मैं तुम्हे बक्श दूंगा।

रानी घबरायी नहीं वह इसे सुन कर हंसी उसने (होने वाले राजा) नवजात शिशु भीमदेव को अपने साथ बांध लिया और घोड़े पर सवार होकर गोरी के दूत को महारानी ने आदेश दिया बोली “जाओ जाकर गोरी से कह दो उनकी शर्तें मान लिया हैं हमने ।

रानी नायिकी देवी द्वारकाधीश श्री कृष्णा के पास गई मौन रह कर कुछ क्षण प्रार्थना की और फिर जोर से बोल उठी ‘जय द्वारकाधीश “I

गोरी का दूत गोरी के पास आकर जैसे ही खुशखबरी सुनाता है की उनकी सारी शर्ते मान ली गयी हैं गोरी खुशी से पागल हो जाता है वह आसान जीत की जश्न मनाने लगा। वह रानी एवं उनके प्यारे बच्चे के साथ कामवासना के सपने देखने लगा था।

नरपिशाच गोरी ने अपने शिविर से बहार निकलकर सोलंकी के सैन्य शिविर की ओर देखने लगा तभी उसे नजर आया कोई घोड़े पर सवार होकर उसके सैन्य शिविर की और आ रहे थे । धूल उड़ना जैसे ही बंद हुआ और घुड़सवार हुए इंसान जैसे जैसे नजदीक आते गए वह देखा की एक खुबसूरत महिला अपने बच्चे को अपने साथ बांधकर उसकी और आ रही है। अचानक से रानी नायिकी देवी की घोड़े की कदम रुक गई मोहम्मद गोरी असमंजस में रह गया अचानक रानी की घोड़े की कदम रुकते देख इससे पहले की वह कुछ समझ पाता उसने देखा उसके शिविरों की और हाथी एवं घोड़े के साथ रानी नायिकी देवी की सेनाओं का शैलाब आ रहा है। रानी की सैन्य बल का शैलाब रेगिस्तानी इलाके को घेर लिया था इससे पहले की गोरी वासना के स्वप्न से बहार निकलकर युद्ध के लिए तैयार होता तीन तरफ से वह और उसकी शिविर को घेर लिया गया था । मोहम्मद गोरी ने कहा “हिन्दू कैसे इतना तेजी से हमला कर सकता है। जब की पैगम्बर ने बताया था की एक मुसलमान दस काफिर हिन्दू के बराबर हैं, मुझे लगा काफिरों की धरती पर मुझे जन्नत की कुंवारी हूर से ज्यादा खूबसूरत औरत को भोगने का आनंद मिलेगा। गोरी के पास अब कुछ समझने का वक्त नहीं था। वह घोड़े पर चढ़कर अपने शिविर के अन्दर आया । गुजरात के वीर राजपूत एक के बाद एक जिहादी सूवरों को काटते रहे। रानी नायिकी देवी के सेनापति ने बताया की क्यों भारत वर्ष को शेरों की धरती कहा जाता हैं। गोरी के पास केवल एक रास्ता बचा था अपनी जान बचाकर भागने का ।

रानी नायिकी देवी के दोनों हाथो में तलवार थी साक्षात् दुर्गा बन अवतारित हुई रानी नायिकी देवी ने एक के बाद एक अनगिनत जिहादी आक्रमणकारियों की सर धर से अलग करती गई जो हाथ उसकी और बढ़ रहा था वह सारे हाथ एक के बाद एक काटती गयी अब गोरी की और बढ़ी जिहादी गोरी का दमन करने के लिये । गोरी उनकी (रानी नायिकी देवी) एक झलक पा कर डर के मारे भागने लगा अभी रानी नायिकी देवी साक्षात् मृत्यु की स्वरुप बन गई थी वह तेजी से भागने लगा फासला बढ़ रहा था। रानी ने एक तलवार फेंककर घोड़े की लगाम को खींचते हुए वह अपने शिकार की ओर चल पड़ी। इस बीच जो भी उसके रास्ते में आया उन सब सुवरों के सर को धर से अलग करती गयी ।

अंत में वह अपने शिकार के काफी करीब पहुंच चुकी थी पूरी ताकत के साथ तलवार से हमला किया लेकिन चूक गई क्यों की गोरी के जिहादी सिपाही ने पीछे से हमला कर रानी नायिकी देवी को घायल कर दिया था और यह चूक भारत के इतिहास में बहुत महंगा साबित हुआ ।

रानी नायिकी देवी की तलवार की वार से जान तो बच गया परन्तु तलवार की वार इतनी तेज थी की गोरी अपना गूदा नहीं बचा पाया। पीछे का हिस्सा हड्डी के साथ निकल गया था इससे पहले की रानी नायिकी देवी दूसरा हमला करती, गोरी के 500 जिहादी सुवरों ने रानी नायिकी देवी को घेर लिया और गोरी बच निकला ।
इसके बाद गोरी के जिहादी गुंडों के पीछा कर रानी नायिकी देवी की सेना ने कुचल डाला। गोरी इतना डर गया था की उसके घाव से खून बहने के बाद भी वह घोड़े से नहीं उतरा था। मुल्तान लौट कर घोड़े से उतरा । गोरी ने अपने सैनिको को हुकुम दिया घोड़ा किसी हाल पे नहीं रुकना चाहिए उसे नींद आजाये या कितनी भी इलाज की जरूरत पड़ जाए पर घोड़ा मुल्तान गंतव्य पहुंच कर ही रुकना चाहिए ऐसा हुकुम दे रखा था और अगर घोड़ा थक कर कहीं रुक जाए तो उसे दूसरे घोड़े पर बैठा कर ले जाने का हुकुम दिया गया। जब गोरी मुल्तान पहुंचा तो पूरी तरह से खून से लतपथ था उसे पता चला की आगे (गुप्तांग) और पीछे गुदा खो चूका था।रानी नायिकी देवी की तलवार से वह हमेशा के लिए नपुंसक बन गया था।

गोरी गुजरात पर दोबारा हमला करने के बारे में सोचने की हिम्मत तक नहीं कर पाया। अगले १३ (तेराह) वर्षों तक भारतवर्ष पर गोरी ने आक्रमण नहीं किया था। दिल्ली नरेश सम्राट पृथ्वीराज चौहान ने उस समय रानी नायिकी देवी की सहायता की थी कर्नल टॉड एवं अन्य पुस्तकों से यह साक्षय मिला दिल्ली नरेश सम्राट पृथ्वीराज चौहान ने एक छत्र शाशन स्थापित कर के ५ राज्यों के राजाओं से रानी नायिकी देवी की सहायता के लिए सेना की टुकड़ी भेजी थी। रानी नायिकी देवी की काल अवतार का दर्शन प्राप्त करने के बाद मानसिक रूप से एवं रानी नायिकी देवी की तलवार की वार से शा-रीरिक रूप से नपुंसक बनने के बाद गोरी की कामेच्छा हमेशा के लिए समाप्त हो गयी थी मानसिक और शारीरिक रूप से। गोरी जब तक जीवित रहा वह उस राजपूतानी के तलवार की धार को कभी नहीं भुला पाया। लड़ाई के लिए अब वह असमर्थ हो चूका था उसे अब अपने दासो पर निर्भर होना पड़ा। उसे कोई बच्चा नहीं हो पाया इसलिए उसने अपनी साडी सम्पत्ति एवं राज्य उसकेद्वारा बनाये गये यौन गुलामो में बाँट दिया अपनी जान बचाने के लिये ।

इस्लामी शासन एक मिथकः

रानी नायिकी देवी जैसी वीरता की मूर्ति यह साबित करती हैं की भारत में स्थायी रूप से इस्लामिक शासन कोई नहीं स्थापित कर पाया था ऐतिहासिक नक़्शे कासिम से लेकर औरंगजेब तक के शाशन काल तक का सब धोखा हैं अप्रमाणित हैं (वामपंथी इतिहा-सकारों ने 1957 से इतिहास लिखना शुरू किया था इन मार्क्स के लाल बंदरो ने जहा जहा मुस्लिम बहुल इलाके का नक्षा मिला 1939 से लेकर 1950 तक का उसीको औरंगजेब एवं मुग़ल, अफ़ग़ान, तुर्क इत्यादि लूटेरो की राजधानी बना दिया और उनके द्वारा शाशित किये गए राज्य बना दिए) ।

आक्रमणकारियों को रोका जाता था कही ना कही जैसे छत्रपति शिवाजी महाराज जी ने मुग़ल के क्रूर शासक औरंगजेब की कब्र महारष्ट्र में ही खुदवा दिया पर उसके सम्पूर्ण दक्कन पे राज करने का ख्वाब पूरा नहीं हो पाया कभी ।

वामपंथ इतिहासकार ने इतिहास में मुगलों को भारत विजय का ताज पहना दिया हकीकत में हिन्दू राजाओं एवं दुर्गा स्वरुप रानी से पराजय होकर जिहादी लूटेरों को वापस अरब के रेगिस्तान में लौटना पड़ा।

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