भैरहवा स्थित होटल मौर्या में वैश्य महासंघ नेपाल का प्रथम जिला स्तरीय सम्मेलन सम्पन्न, राष्ट्रीय संगठन और पहचान के लिए एकजुटता पर जोर

वैश्य समाज देश की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास में हमेशा अग्रणी रहा- ई. राम चन्द्र शाह अध्यक्ष वैश्य महासंघ काठमांडू 

मनोज कुमार त्रिपाठी 

भैरहवा नेपाल! वैश्य समाज की पहचान, उत्थान और सम्मान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए आज राष्ट्रीय वैश्य महासंघ नेपाल का प्रथम रूपंदेही जिला स्तरीय सम्मेलन भैरहवां कस्बे के प्रतिष्ठित होटल मौर्या में भव्य रूप से सम्पन्न हुआ। सम्मेलन में नेपाल के विभिन्न जिलों से आए वैश्य समाज के करीब 17 घटक दलों के अध्यक्षों ने भाग लिया, जिसमें महिला अध्यक्षों की भी सक्रिय और प्रेरणादायक सहभागिता देखी गई।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, काठमांडू जिला के अध्यक्ष ई. रामचंद्र शाह ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि “वैश्य समाज नेपाल की कुल जनसंख्या का लगभग 35% है, इसके बावजूद अब तक वैश्य आयोग का गठन नहीं हो पाया है। यह विडंबना है कि समाज आर्थिक और सामाजिक हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है, टैक्स देने में अग्रणी है, फिर भी उसकी पहचान और अधिकारों को मान्यता नहीं मिली है। अब समय आ गया है कि हम आपसी मतभेदों को भुलाकर संगठित हों और व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज के लिए कार्य करें। सम्मेलन में विशिष्ट अतिथियों के रूप में राम उदार महासेठ, बजरंगी प्रसाद शाह, अजय गुप्ता, अमित गुप्ता, राजेंद्र गुप्ता, नरेंद्र प्रसाद रौनियार और श्रीमती पूनम जायसवाल सहित अनेक समाजसेवियों ने अपने विचार रखे। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में यह कहा कि यदि वैश्य समाज दिल और नीयत से कार्य करे, तो वह देश की सबसे बड़ी और सशक्त सामाजिक शक्ति बन सकता है। समाज आज बिखरा हुआ है, उसे संगठित करना समय की मांग है।

सभा में उपस्थित अन्य प्रमुख लोगों में राधेश्याम कसौधन, डॉक्टर शालिनी भक्ति, त्रिलोकी प्रसाद गुप्ता, विष्णु पटवा, बैजनाथ अग्रहरि, संतोष जायसवाल, न्यू वर्तमान जायसवाल अध्यक्ष भैरहवा, पारस केसरी, संजय कौशल, अजय गुप्ता भैरहवा, दुर्गा गुप्ता, मोहन बनिया, गंगा सागर अग्रहरि, चंद्र मोहन पटवा, भोला बनिया, श्याम किशोर शाह, गुरु चरण प्रजापति, आरती अग्रहरि, रामकेश गुप्ता, पूर्णिमा रौनियार, संदीप गुप्ता, रितेश बरनवाल, किरण शाह आदि ने भी सम्मेलन को संबोधित किया।

सभी वक्ताओं का यही संदेश था कि संगठन में ही शक्ति है और जब तक समाज संगठित नहीं होगा, तब तक उसे उसका उचित अधिकार नहीं मिल सकता। वैश्य समाज देश के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास में हमेशा से अग्रणी रहा है, अब समय आ गया है कि उसे उसका सामाजिक और राजनीतिक अधिकार भी मिले। सम्मेलन का समापन सभी प्रतिनिधियों और उपस्थितजनों के बीच एकजुटता और सहयोग की भावना के साथ हुआ।

इसके उपरांत सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया कार्यक्रम का सफल संचालन तारकेश्वर कांदू ने किया।

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