भैरहवा में सातवां लुंबिनी महोत्सव बना आकर्षण का केंद्र

अब तक एक लाख से ज्यादा आगंतुकों ने किया शिरकत, करोड़ों का व्यापार

मनोज कुमार त्रिपाठी

भैरहवा, नेपाल!
सातवां लुंबिनी महोत्सव 2082 इन दिनों भैरहवा में रौनक बिखेर रहा है। चेंबर ऑफ कॉमर्स रूपंदेही के अध्यक्ष सचिन रोका ने बताया कि महोत्सव मंसिर 3 से मंसिर 21 गते तक आयोजित हो रहा है और आज बारहवां दिन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ है। ग्यारह दिन का कार्यक्रम पहले ही बेहद सफल रहा था और आयोजकों को उम्मीद है कि आने वाले आठ दिनों में भी भीड़ और उत्साह चरम पर रहेगा।

 

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सचिन रोका ने बताया कि महोत्सव में अब तक एक लाख से अधिक लोग पहुंच चुके हैं। महोत्सव का लक्ष्य साढ़े तीन लाख आगंतुकों का रखा गया था, जिसमें से एक लाख का आंकड़ा पहले ही पार हो चुका है। व्यापार की दृष्टि से भी मेला बेहद सफल साबित हो रहा है।

आयोजकों के अनुसार मेले में 15–20 करोड़ रुपये के लेन-देन का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से लगभग 7 करोड़ रुपये का व्यापार अब तक हो चुका है। सप्ताह के अंतिम दिनों में भीड़ बढ़ने की संभावना को देखते हुए आयोजकों को पूरा विश्वास है कि लक्ष्य आसानी से पूरा हो जाएगा।

 

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मेले में खाने-पीने, वाहन प्रदर्शन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और पारिवारिक मनोरंजन की व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। साफ-सफाई, सुरक्षा और अनुशासन को लेकर भी विशेष इंतजाम किए गए हैं, जिन्हें आगंतुकों से खूब सराहना मिल रही है।

मुस्लिम समुदाय की बड़ी भागीदारी को लेकर पूछे गए सवाल पर सचिन रोका ने कहा कि “यह महोत्सव जात-धर्म से परे है। सभी समुदाय के लोग आ रहे हैं, और मुस्लिम परिवारों व बच्चों की संख्या भी इस बार काफी अधिक देखी गई है। यह हमारी व्यवस्था और सकारात्मक माहौल का परिणाम है।”

चेंबर ऑफ कॉमर्स के सह-कोअध्यक्ष संतोष शुक्ला, जो महोत्सव की उप समिति के समन्वयक भी हैं, ने जानकारी
दी कि “कल तक लगभग 1,26,000 से 1,27,000 लोग मेला देख चुके थे। यहां मजहब या जाति का कोई भेद नहीं—सब लोग अपनी संस्कृति और धरोहर को देखने आ रहे हैं। भारत से भी लगभग 80% आगंतुकों ने शनिवार की छुट्टी का लाभ उठाते हुए मेले का अवलोकन किया।”

महोत्सव स्थल पर लोकप्रिय गायिका कल्पना कुसुम का विशेष प्रदर्शन भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। नेपाल व भारत में अपनी दमदार प्रस्तुतियों के लिए मशहूर कल्पना कुसुम ने मेले के माहौल में और ऊर्जा भर दी।

समग्र रूप से देखें तो भैरहवा का यह महोत्सव न केवल व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि भारत-नेपाल सांस्कृतिक संबंधों को भी नई ऊँचाइयों पर ले जा रहा है।

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