“डिजिटल विद्रोह की आहट: नेपाल में जनक्रांति का आगाज — वरिष्ठ अधिवक्ता बोले, अब बदलाव अपरिहार्य है”

मनोज कुमार त्रिपाठी

भैरहवा, नेपाल!
नेपाल की राजनीतिक जमीन पर अब असंतोष की गूंज तेज़ होती जा रही है। भैरहवा के मौर्य होटल में आयोजित एक विशेष सामाजिक-राजनीतिक संगोष्ठी में नेपाली सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. दिनेश त्रिपाठी और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने देश की मौजूदा स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि नेपाल इस समय नैतिकता, जवाबदेही और लोकतांत्रिक मूल्यों के गहन पतन के दौर से गुजर रहा है।

YouTube player

डॉ. दिनेश त्रिपाठी ने कहा कि यह देश के लिए अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण समय है क्योंकि जिन नेताओं को जनता ने रक्षक समझकर सत्ता सौंपी थी, वही अब जनता के विश्वास को तोड़ रहे हैं। आज सत्ता में बैठे लोग जनता की आवाज़ दबाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर दमनकारी रवैया अपना रहे हैं। सरकार ने अचानक कई डिजिटल प्लेटफार्मों को बंद कर दिया — सिर्फ इसलिए क्योंकि वहां से जनता की आवाज़ और सरकार की आलोचनाएं उठ रही थीं।

डॉ. दिनेश त्रिपाठी ने कहा कि जो युवा और आत्मनिर्भर नागरिक अपने दम पर रोजगार और शिक्षा के नए डिजिटल मॉडल तैयार कर रहे थे, सरकार ने उन्हीं की राह रोक दी है। सरकार जनता को रोजगार देने में विफल रही है और जो लोग स्वयं आगे बढ़ रहे थे, उनकी भी रोज़ी-रोटी छीनी जा रही है। इससे जनता में भारी असंतोष और आक्रोश फैल रहा है, और अब देश में एक डिजिटल विद्रोह की लहर दिखाई देने लगी है।

सभा में उपस्थित युवाओं ने “Gen Z Revolution for Change” के नारे लगाए और कहा कि अब नेपाल को नई सोच, नई राजनीति और नई नैतिकता की आवश्यकता है।

वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. दिनेश त्रिपाठी ने युवाओं से कहा कि अब समय आ गया है जब नागरिक, विशेषकर नई पीढ़ी, सिर्फ दर्शक नहीं बल्कि परिवर्तन की असली ताकत बनें। उन्होंने कहा — “बदलाव अब कोई विकल्प नहीं, बल्कि एक आवश्यकता है।”

डॉ. दिनेश त्रिपाठी ने मीडिया जगत से भी अपील की कि वह सत्ता के दबाव में झुके बिना जनता की सच्ची आवाज को उठाए। उनका कहना था कि मीडिया लोकतंत्र की आत्मा है, लेकिन अगर वही सत्ता के इशारों पर चलने लगे तो लोकतंत्र एक दिखावा बनकर रह जाएगा।

इसी कार्यक्रम में डॉ. दिनेश त्रिपाठी ने हाल ही में हुई उस घटना पर भी गहरी नाराज़गी व्यक्त की, जिसमें नेपाली नागरिकों के बच्चों पर गोली चलाई गई थी। उन्होंने कहा कि इस अमानवीय घटना में शामिल उच्च अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और न्यायिक जांच होनी चाहिए।

डॉ. दिनेश त्रिपाठी ने कहा — “आम जनता के बेटे-बेटियों पर गोली चलाने वाली सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय मानकों का उल्लंघन किया है। ऐसे अपराधियों को राजनीतिक प्रभाव के कारण माफ करना न्याय के खिलाफ होगा।”

उन्होंने आगे कहा कि देश में शांति, न्याय और जवाबदेही बनाए रखने के लिए नागरिक अधिकारों की रक्षा आवश्यक है। आंदोलन को दबाकर नहीं, बल्कि संवाद और समाधान के रास्ते से आगे बढ़ना चाहिए।

 

कार्यक्रम में उपभोक्ता मंच रूपन्देही की उपाध्यक्ष पार्वती भंडारी ने भी कहा कि नागरिक समाज वर्तमान सरकार की उपस्थिति और जिम्मेदारी को महसूस नहीं कर पा रहा है।

उन्होंने कहा, “सरकार नागरिकों की समस्याओं और आवाजों की लगातार अनदेखी कर रही है। जनता के अधिकारों और हितों के मुद्दों पर नागरिक समाज को और अधिक सशक्त भूमिका निभानी चाहिए।”

कार्यक्रम में उपस्थित अन्य वक्ताओं ने भी देश में सुशासन, जवाबदेही और नागरिक अधिकारों की सुनिश्चितता के लिए संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम के समापन पर डॉ. दिनेश त्रिपाठी ने कहा कि नेपाल को अब नैतिक और जवाबदेह नेतृत्व की आवश्यकता है। यदि अब भी बदलाव की राह नहीं चुनी गई, तो आने वाली पीढ़ियां इस चूक को कभी माफ नहीं करेंगी। उन्होंने अंत में कहा —
“बदलाव अब अपरिहार्य है।”

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!