भारतीय क्रिकेट के एक युग का हुआ अंत
उमेश चन्द्र त्रिपाठी
नई दिल्ली! अब मैदान पर सफेद जर्सी में रोहित शर्मा और विराट कोहली नहीं दिखेंगे। दोनों ने और खासकर विराट कोहली ने अपने संन्यास से भारतीय क्रिकेट में एक बड़ी लकीर खींच दी है। ऐसे वक्त में संन्यास लिया जब लगभग हर किसी के जुबां से यही निकल रहा है- इतनी भी क्या जल्दी थी।
बता दें कि विराट कोहली 36 साल के हैं लेकिन उनकी फिटनेस, उनका एनर्जी लेवल, उनका जोश, उनकी फुर्ती, उनका जज्बा सब कुछ ऐसा कि युवा से युवा क्रिकेटर भी आश्चर्य में पड़ जाएं। टेस्ट की ही बात करें तो अभी उनमें काफी क्रिकेट बाकी थी। फिर भी विराट कोहली ने ऐसा किया जो भारत में बहुत ही अविश्वसनीय माना जाता है। शीर्ष पर रहते हुए संन्यास, न कि टीम पर बोझ बनकर कैरियर लंबा खींचने की कोशिश। ‘अब संन्यास ले ही लो’ की आवाज को उठने से पहले उन्होंने रिटायरमेंट का ऐलान कर दिया। करियर में कभी वह वक्त आने ही नहीं दिया कि लोग कहें ‘संन्यास क्यों नहीं ले रहे’। लोग अब पूछेंगे, ‘अभी संन्यास क्यों ले लिया।
विराट कोहली चाहते तो अभी और एक-दो साल टेस्ट क्रिकेट खेल सकते थे। बीसीसीआई तो उन्हें टेस्ट से संन्यास न लेने के लिए मना ही रही थी। लेकिन किंग कोहली ने दिल की सुनी। युवाओं के लिए रास्ता साफ किया। अंतर्राष्ट्रीय टी-20 से भी उन्होंने तब संन्यास लिया जब अपनी शानदार बल्लेबाजी से टीम इंडिया को वर्ल्ड चैंपियन बनाने में बड़ी भूमिका निभाई।
जहां तक कप्तानी की बात है कप्तानी को लेकर भी उनका यही रुख था। तब कप्तानी छोड़ दिया जब वह कप्तान के तौर पर बेस्ट थे। बतौर कप्तान उन्होंने 68 टेस्ट खेले जिनमें टीम इंडिया को 40 में जीत मिली। 17 में हार और 11 ड्रॉ रहे। उन्होंने विदेशी जमीन पर भारत की जीत को तुक्का नहीं, अपने आत्मविश्वास के तौर पर स्थापित किया ।

