भारत-नेपाल सीमा पर पायलट प्रोजेक्ट के तहत फेस आईडी स्केनर का पहरा,बचकर निकल पाना मुश्किल 

आसानी से पार नहीं कर सकेंगे लोग,दर्ज कराना होगा पूरा ब्योरा 

उमेश चन्द्र त्रिपाठी 

लखनऊ! प्रदेश के श्रावस्ती,

बलरामपुर, लखीमपुर, पीलीभीत, सिद्धार्थनगर व महाराजगंज जिले नेपाल सीमा से सटे हैं। प्रतिदिन भारत व नेपाल के बीच हजारों लोगों का आवागमन होता है। कई बार तस्कर और अपराधी भी भीड़ का फायदा उठाकर सीमा पार कर जाते हैं।

नेपाल और भारत की सीमा पार करना अब आसान नहीं होगा। अवांछित प्रवेश करने वालों को रोकने के लिए सीमा पर हाल ही में आठ और फेस रीडिंग तथा आइडी स्कैनर कैमरे लगाए गए हैं। इससे भारतीयों का आधार कार्ड व नेपाल के लोगों के नागरिकता कार्ड मिलान करने के बाद ही सीमा पार करने का नियम बनाया है। हर आने-जाने वाले लोगों का ब्योरा भी कंप्यूटर में दर्ज किया जा रहा है। जांच के दौरान यदि कंप्यूटर में दर्ज रिकार्ड से किसी का मिलान नहीं होगा तो संबंधित को सीमा पार जाने नहीं दिया जाएगा।

भारत का मित्र राष्ट्र नेपाल से रोटी-बेटी का रिश्ता माना जाता है। दोनों देशों के बीच स्थित सीमा की सुरक्षा का जिम्मा एसएसबी के पास है। सीमा के रास्ते कोई संदिग्ध पार न कर पाए, इसे लेकर अब एसएसबी चेक पोस्ट पर फेस रीडिंग सिस्टम एंड आइडी स्कैनर लगाया गया है। वहीं, आने-जाने वाले सभी वाहनों का डाटा एकत्र करने को लेकर पहले भी हाई टेक्नोलाजी के कैमरों को लगाया जा चुका है। सीमा पर अब तक 34 कैमरों को लगाकर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है।

नेपाल व भारत से आने वालों का ब्योरा दर्ज करने के लिए आठ कैमरों को एक सप्ताह पूर्व लगाया गया है। इसे एसएसबी कैंपस में लगे कंप्यूटर से जोड़ा गया है। नेपाल से भारत आने वाले लोगों का नागरिकता कार्ड, जन्म प्रमाण-पत्र या वोटर आइडी व भारत से नेपाल जाने वालों का आधार कार्ड कैमरे के सामने रखा जाता है। इसके माध्यम से संबंधित की पूरी डिटेल कंप्यूटर के हार्ड डिस्क में दर्ज की जाती है। एक बार यह डाटा दर्ज होने के बाद पुनः कैमरे के सामने आने पर संबंधित का पूरा ब्योरा चेक पोस्ट पर लगी स्क्रीन पर आसानी से दिख जाएगा।

नेपाल व भारत आने-जाने वालों को एसएसबी चेक पोस्ट पर लगे कैमरों के सामने खड़ा कर फेस रीडिंग कराया जाता है। इस प्रणाली में कैमरे द्वारा चेहरे और उसकी विशेषताओं को कैप्चर कर डाटा संग्रहीत कर लिया जाता है।

कमांडेंट एसएसबी 42 वीं वाहिनी गंगा सिंह उदावत ने मीडिया को बताया कि हेड क्वार्टर ने पायलट प्रोजेक्ट सिस्टम के तहत इन कैमरों को लगाया गया है। इससे भारत से नेपाल आने-जाने वालों का ब्योरा रिकार्ड किया जा रहा है। कौन व्यक्ति कब और कितनी बार आया और वह वापस अपने देश लौटा या नहीं, इसकी जानकारी अब आसानी से मिल सकेगी।

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